सुभाष के झा वरिष्ठ फिल्म पत्रकार हैं और अमिताभ बच्चन के मित्र भी। ये बात अलग है कि वे अमिताभ से ज्यादा खुद को जया बच्चन का दोस्त मानते हैं। कारण भी है,  दोनों की मुलाकात का कारण भी जया ही थीं। सुभाष के झा ने अमिताभ के 75वें जन्मदिवस पर उनसे जुड़ीं यादें कुमार रजत से साझा कीं।

– अमिताभ बच्चन से पहली मुलाकात कब और कैसे हुई? 

– अमिताभ से पहले मेरी जान-पहचान जया जी से थी। मैं उनके घर कई बार गया मगर अमिताभ से नहीं मिलता। कोई वजह नहीं थी, बस यूं ही। आप इसे मेरी सनक कह सकते हैं। ये 1998-99 की बात है। दो साल ऐसा ही चला। फिर, जया जी ने ही कहा कि ये गलत बात है। फिर अमित जी से पहली बार फोन पर बातचीत हुई।

 

हमारी आमने-सामने की पहली मुलाकात में ज्यादा बात नहीं हुई मगर उनकी विनम्रता ने मुझे प्रभावित किया। इसके बाद मुलाकातों का सिलसिला चलता रहा। अमित जी ने 2000 में ‘कौन बनेगा करोड़पति’ शो के दौरान मुझे दोस्त कहकर संबोधित किया। ये उनका बड़प्पन है। मैं उनकी बहुत इज्जत करता हूं। मेरी दोस्ती जया और अभिषेक से ज्यादा है।

 

– आपकी नजर में क्या खासियत है, जिसने अमिताभ को महानायक बनाया?

– अमित जी सुपरस्टार से ज्यादा एक अच्छे इंसान है। विनम्रता उनकी सबसे बड़ी ताकत है। काम के प्रति उनका सपर्मण काबिलेतारीफ है। समय के पाबंद हैं। इतने सालों के बाद भी वह अपने रोल की तैयारी पूरी गंभीरता से करते हैं। सेट पर आते ही अपने डॉयलॉग्स पढऩे लगते हैं।

 

रोल बड़ा हो या छोटा, फिल्में बड़े बैनर की हो या छोटे बैनर की, उनके लिए एक्साइटमेंट का लेवल हर बार एक जैसा होता है। ये सभी खूबियां उन्हें दूसरों से अलग बनाती हैं, इसलिए वे महानायक हैं।

 

– अमिताभ के महानायक बनने में आप बॉलीवुड में किन लोगों की बड़ी भूमिका मानते हैं?

– सबसे बड़ी भूमिका तो जया बच्चन की ही है। वे उस दौर में अमिताभ से बड़ी स्टार थीं बावजूद उन्होंने मिस बच्चन बनकर घर संभालने को प्राथमिकता दी। कुछ फिल्में भी करती रहीं। इसके अलावा के अब्बास जिन्होंने सात हिंदुस्तानी में पहली बार अमिताभ के टैलेंट को प्लेटफॉर्म दिया।

 

ऋषिकेश मुखर्जी जिन्होंने अमिताभ के अंदर के अभिनेता को पहचाना और कई यादगार भूमिकाएं दीं। मनमोहन देसाई जिनकी फिल्मों ने अमिताभ को सुपरस्टार का तमगा दिया।

 

फिल्म के अमिताभ और टीवी के अमिताभ में आप क्या अंतर पाते हैं? 

– फिल्मों में अमिताभ की भूमिका एंग्री यंग मैन की थी। 2000 में जब वे टीवी पर आए तो लोगों को वास्तविक अमिताभ के बारे में पता चला। उनकी विनम्रता आज भी केबीसी के शो में देखी जा सकती है। आप कह सकते हैं कि अमिताभ के आने से टीवी की दुनिया में क्रांतिकारी बदलाव आए।

 

– अमिताभ की सबसे बड़ी भूल आप क्या मानते हैं? 

– राजनीति में जाना उनकी सबसे बड़ी भूल थी। खुद अमिताभ भी कई मौकों पर यह बात स्वीकार कर चुके हैं। इमरजेंसी के बाद मीडिया और उनके बीच भी काफी तनातनी रही। अघोषित बैन भी रहा। ये भी उनकी भूल कह सकते हैं।

 

– अमिताभ बच्चन ने 2000 से पहले काफी बुरा वक्त झेला। उस वक्त की उनकी कुछ यादें? 

– दरअसल, अमिताभ उस समय खुद कंफ्यूज थे। उनकी छवि एंग्री यंग मैन की थी मगर उनकी उम्र ढल रही थी। इस दौर में वह समझ नहीं पा रहे थे कि वे जाए तो जाए किधर। हीरो की भूमिकाएं करें या चरित्र अभिनेता की। इसी दौरान उन्होंने कुछ गलत फिल्में भी साइन कीं।

 

वर्ष 2000 में आई ‘मोहब्बतें’ ने उन्हें और बॉलीवुड को एक नए अमिताभ से मिलाया। इसी दौरान उन्होंने टीवी पर ‘कौन बनेगा करोड़पति’ शो साइन किया और फिर आगे इतिहास है। आपको आश्चर्य होगा कि जया जी और मैंने भी उन्हें टीवी पर जाने से मना किया था मगर वे जानते थे कि वे क्या कर रहे हैं? उनका निर्णय आखिरकार सही साबित हुआ।

 

– अमिताभ, हरिवंश राय बच्चन के सुपुत्र हैं। साहित्य से भी उनका लगाव है। इससे जुड़ीं कुछ यादें। 

– अमिताभ बच्चन बहुत पढ़ते हैं। खुद भी बहुत अच्छी कविताएं लिखते हैं, मगर उसे कभी सार्वजनिक नहीं करते। ये उनके निजी पल हैं। एक बार उन्होंने मेरी किताब की भूमिका लिखी। किताब के संपादक ने उसमें सिर्फ दो शब्द बदल दिए। पहली बार किसी बात को लेकर मैंने उन्हें नाराज देखा। बाद में वह शब्द हूबहू गया। ये वाकया बताता है कि वे लिखे शब्दों को कितना महत्व देते हैं।

 

कई बार मैंने उनसे ऑटोबायोग्राफी लिखने को कहा। अपने स्तर से लिखने में मदद करने को भी कहा मगर उन्होंने इसे सिरे से नकार दिया। बोले- कि मैं ऐसा काम नहीं करूंगा जिसमें मुझे झूठ बोलना पड़े। लिखो तो सच्चा लिखो, नहीं तो कोई मतलब नहीं ऑटोबायोग्राफी लिखने का।

 

– अमिताभ के पास पैसा, शोहरत, इज्जत सब है। आपकी नजर में उनकी कोई ऐसी ख्वाहिश जो अब तक अधूरी है?

– (सोचते हुए) वे पियानो बजाना सीखना चाहते हैं। ये चाहत शायद अब तक अधूरी है।

 

– अमिताभ का पटना या बिहार से जुड़ा कोई किस्सा जो याद हो? 

– अमिताभ जब 2011 में ‘आरक्षण’ फिल्म के प्रमोशन के लिए पटना आए तो तमाम सुरक्षा कारणों को दरकिनार कर राजेंद्र नगर स्थित मेरे आवास आए। यहां मेरी मां के हाथों से बनाई स्पेशल डिश ‘बेक दही’ उन्हें खूब पसंद आई। शायद केबीसी के सेट पर उन्हें जब मालूम चला कि बिहार में मुशहर लोग आज भी अपनी भूख मिटाने के लिए चूहा खाते हैं तो वे हैरत में पड़ गए। उन्होंने इस बारे में मुझसे बात की। फिर अपने स्तर से उनकी मदद भी की।

 

– अमिताभ बच्चन की ऐसी पांच फिल्में जो आपको पसंद हों? 

– बेमिसाल, सौदागर, ब्लैक, मैं आजाद हूं, अभिमान।

 

– अमिताभ की वे फिल्में जो नापसंद हैं? 

– बंसी-बिरजू, मृत्युदाता, लाल बादशाह।

 

– अमिताभ 75 साल के हो गए? आगे अमिताभ को आप और किस रूप में देखते हैं? 

– अमिताभ बच्चन हमेशा सरप्राइज करते हैं। आप उनके बारे में अंदाज नहीं लगा सकते। आज से पहले किसने सोचा था कि 75 साल के अभिनेता को ध्यान में रखकर फिल्में लिखी जाएंगीं मगर अमिताभ के लिए ये हो रहा है। दुआ है कि वे 100 साल से भी ज्यादा जिंदा रहें और इसी तरह सभी का मनोरंजन करते रहें। छाये रहें।

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