अमृत नाम निधान है, मिल पीवोह भाई..

अमृत नाम निधान है, मिल पीवोह भाई..

16th April 2018 0 By Kumar Aditya

सिख समुदाय के लोगों के बीच रविवार को वैशाखी की धूम रही। इस मौके पर गुरुद्वारा साहिब को विशेष तौर पर सजाया गया था। 10वें गुरु गोविंद सिंह ने 349 वर्ष पहले आज ही के दिन खालसा पंथ की स्थापना की थी। इसी की खुशी में सिख समुदाय के लोग यह पर्व मनाते हैं।

 

गुरुद्वारा साहेब में रविवार को कीर्तन, आरती, अरदास और भंडारे का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पंजाबी समुदाय, पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों के अलावा अन्य लोगों ने भी हिस्सा लिया। सुबह 10:30 बजे से हरमन्दिर जी पटना साहिब के हजुरी रागी नवेंद्र सिंह और हरजीत सिंह की मंडली के द्वारा अमृत नाम निधान है, मिल पीवोह भाई… कीर्तन गुरु गोविंद सिंह के दरबार में प्रस्तुत की गई। इस दौरान सुखमनी साहिब का पाठ सरदार भाई संजय सिंह व भाई यशपाल सिंह ने प्रस्तुत की। इसके बाद आरती व अरदास हुआ। श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद बांटे गए। इसके बाद लोगों ने लंगर चखे। मौके पर गुरुद्वारा समिति के अध्यक्ष सरदार खेमचंद बचियानी, सचिव सरदार त्रिलोचन सिंह, उपाध्यक्ष सरदार हरविंदर सिंह भंडारी, कोषाध्यक्ष हरिचरण सिंह, उपसचिव चरणजीत सिंह, मीडिया प्रभारी हर्षप्रीत सिंह, अन्नु सोडी, जयंती बचियानी, हीना कौर, श्याम देवी, रमेश सूरी, शरद, सागर व विनोद नागपाल मुख्य रूप से मौजूद थे।

आईजी ने गुरुवाणी सुन प्रसाद किया ग्रहण

भागलपुर प्रक्षेत्र के आईजी सुशील मान सिंह खोपड़े ने वैशाखी के अवसर पर गुरुद्वारा में मत्था टेका और गुरुवाणी सुनकर प्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर उन्होंने बताया कि बुराई पर जीत के प्रतीक के तौर पर इस त्योहार को कई सौ सालों से मनाया जा रहा है। अमन-चैन के साथ मनाया जाने वाला यह उत्सव गर्व की बात है।

 

वैशाखी के दिन ही खालसा पंथ की रखी गई थी नींव

 

वर्ष 1699 में सिखों के 10वें गुरु, गुरु गोविन्द सिंह ने वैशाखी के दिन ही खालसा पंथ की नींव रखी थी। जात-पात और सामाजिक बुराइयों से ऊपर उठकर सभी वर्गों को जोड़कर पंथ की नीव रखी थी। ‘खालसा’ फ्रेंच के खालिस शब्द से बना है। इसका अर्थ शुद्ध, पावन या पवित्र होता है। खालसा पंथ की स्थापना के पीछे गुरु गोविन्द सिंह का मुख्य लक्ष्य लोगों को अत्याचारों से मुक्त कर उनके धार्मिक, नैतिक और व्यावहारिक जीवन को श्रेष्ठ बनाना था। वैशाखी को किसान भी हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। पंजाब और हरियाणा में जब रबी की फसल पककर तैयार हो जाती है, तब बैसाखी मनाई जाती है। वैशाखी के दिन ही सूर्य मेष राशि में संक्रमण करता है, इसलिए इसे मेष संक्रांति भी कहते हैं।

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