इंस्पेक्टर कन्हैया लाल पर पूर्व एसएसपी विवेक कुमार ने कराया था झूठा केस

इंस्पेक्टर कन्हैया लाल पर पूर्व एसएसपी विवेक कुमार ने कराया था झूठा केस

12th January 2019 0 By Kumar Aditya

 

पूर्व एसएसपी विवेक कुमार अक्सर मेरे साथ गाली-गलौज करते थे।  उनके खिलाफ तत्कालीन डीआईजी  को आवेदन भी दिया था। बस इसी  खुन्नस को लेकर पूर्व एसएसपी ने  मेरे खिलाफ तिलकामांझी थाना  में नामजद एफआईआर दर्ज करा  दी। अधिवक्ता राजीव सिंह ने  एफआईआर (789/15) में उन्हें  झूठा फंसाया गया है। … यह उस  पत्र का मजमून है, जिसे कोतवाली  के पूर्व थानेदार इंस्पेक्टर कन्हैयालाल  ने डीजीपी को दिया था। कन्हैयालाल  के पत्र पर डीजीपी ने जांच शुरू करा  दी है। अब इस मामले की जांच का  जिम्मा एसएसपी ने सिटी डीएसपी  राजवंश सिंह को दी है। यदि इंस्पेक्टर  का आरोप सच निकला तो विवेक  पर विभागीय कार्रवाई चल सकती है।  लेकिन यदि आरोप झूठा निकला तो  कन्हैया लाल पर इंस्पेक्टरी जाने का  भी खतरा उत्पन्न हो जाएगा। कारण,  वरीय अधिकारियाें पर गंभीर आरोप  लगाना भी सरकारी सेवा संहिता का  उल्लंघन है। इंस्पेक्टर कन्हैयालाल  अभी निगरानी विभाग पटना में  पदस्थापित है।

27 नवंबर 2015 की रात वकील पर गोली चली थी

27 नवंबर 2015 की रात सदर अस्पताल में क्षत्रिय युवा मंच के अध्यक्ष व वकील राजीव सिंह पर अपराधियों ने गोली चलाई थी। मामले में पूर्व  कोतवाली इंस्पेक्टर कन्हैया लाल, दाऊद बाट निवासी सुरेंद्र कुमार सोनू  व अन्य पर राजीव सिंह ने तिलकामांझी थाने में केस दर्ज कराया था।  अपराधियों ने राजीव के दरवाजे पर दस्तक देकर दरवाजा खुलवाया था  और कहा था कि सुरेंद्र सोनू और कन्हैया लाल से पंगा लेता है? इसके  बाद पिस्तौल का ट्रिगर दबा दिया था। लेकिन गोली मिस फायर हो गई  थी। वकील ने एक अपराधी के हाथ से पिस्तौल छीन लिया था। इस केस  में शुभम कुमार नामक एक अन्य आरोपी का भी नाम आया था।

शुभम के बयान से फंसे थे बबरगंज थाने के एक अन्य केस में पुलिस ने शुभम कुमार को गिरफ्तार  किया था। उसने राजीव सिंह पर  हुए हमले में वह भी शामिल था।  बबरगंज इलाके का गंगा उर्फ छोटू  उर्फ चंद्रिका ने राजीव सिंह का  फोटो मोबाइल में दिखाकर कहा था  कि इसे मार देने पर पैसा मिलेगा। सीजर लिस्ट पर साइन नहीं इंस्पेक्टर का कहना है पुलिस  ने इस हथियार को प्रस्तुति सह  जब्ती सूची बना कर विधिवत  जब्त भी किया था। लेकिन प्रस्तुत  सह जब्ती सूची में हथियार  प्रस्तुत करने वाला नाम, पता  और हस्ताक्षर ही नहीं है। जबकि हस्ताक्षर होना अनिवार्य है।

फिलहाल सस्पेंडहैं विवेक

मुजफ्फरपुर में एसएसपी रहते विवेक कुमार पर शराब माफिया से  मिलीभगत के आरोप में विजिलेंस  ने छापेमारी की थी। बाद में सरकार  ने उन्हें निलंबित करते हुए पटना  बुला लिया था।

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