Crime INTERNATIONAL TOP NEWS

इराक में लापता 39 भारतीयों को आईएस ने मारा, हरजीत ने अली बनकर बचाई थी अपनी जान: संसद में सुषमा

नई दिल्ली. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने मंगलवार को संसद में बताया कि इराक के मोसुल से अगवा हुए 39 भारतीय नागरिकों को आईएसआईएस ने मार दिया। मृतकों का शव भारत लाने के लिए प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और जल्द ही वापस लाया जाएगा। 2014 में भारत से मोसुल में काम करने गए मजदूरों को आतंकियों ने किडनैप कर लिया था। मोसुल की आजादी के बाद मजदूरों के बारे में जानकारी जुटाने के लिए जनरल वीके सिंह इराक गए थे। किडनैप किए गए 40 भारतीयों में से एक हरजीत मसीह आतंकियों के चंगुल से बच निकला था। मसीह ने कहा था कि उसने बाकी भारतीयों को अपनी आंखों के सामने मरते देखा था।

पिछले साल सुषमा बोली थीं- बिना सबूत मृत घोषित नहीं करूंगी
– सुषमा ने कहा, “एक बहुत महत्वपूर्ण सूचना सदन को बताना चाहती हूं। जून 2015 में इराक में हमारे 39 भारतीयों को आईएसआईएस ने बंधक बना लिया गया था।” सुषमा ने सदन में जून 2015 में किडनैप होने की बात कही, जबकि लोगों को 2014 में अगवा किया गया था। पिछली बार सदन में 27 जुलाई 2017 में चर्चा हुई थी। बाजवा जी ने शून्यकाल में ये विषय उठाया था। अगले दिन (28 जुलाई) में सदन में जवाब देने आई थी।”
– “तब मैंने कहा था कि जब तक मेरे पास कोई सबूत नहीं होगा, तब तक उन्हें मृत घोषित नहीं करूंगी। बिना सबूत को किसी को मर गया कह देना पाप है और सरकार के लिए गैर-जिम्मेदाराना है। इसलिए न तो मैं गैर-जिम्मेदाराना काम करूंगी और न ही पाप करूंगी। लेकिन जिस भी दिन एक भी सबूत मिल गया, पक्का सबूत मिल गया और संसद का सत्र चल रहा होगा तो चेयर से अनुमति मांगकर कार्यवाही रुकवाकर सदन में जानकारी दूंगी। और अगर सत्र नहीं चल रहा होगा तो 10 मिनट के अंदर ट्विटर पर देश को जानकारी दूंगी।”
– “आज मेरे पास दोनों बातों के पक्के सबूत है। पहला- हरजीत मसीह की कहानी सच्ची नहीं थी। दूसरा- भारी मन से कह रही हूं कि वो लोग मार दिए गए हैं।”

वीके सिंह को कंपनी मालिक से हिंदुस्तानियों की जानकारी मिली
– “हरजीत सच नहीं बोल रहा था, इसका सबूत ये है कि पिछली बार वीके सिंह इराक में खोजने के लिए गए तो मैंने कहा था कि सबसे पहले मोसुल जाकर कंपनी के मालिक से मिलना। आपको वहां कुछ महत्वपूर्ण सुराग मिलेंगे। उन्होंने अपनी यात्रा मोसुल से ही शुरू की।”
– “कंपनी के मालिक ने बताया कि उनके यहां 40 हिंदुस्तानी और कुछ बांग्लादेशी काम करते थे। जब आईएसआईएस ने मोसुल पर कब्जा करना शुरू किया तो सभी को वहां से निकल जाने को कहा। सबसे पहले इराकी नागरिक निकले, उसके बाद बाकी नेशनलिटीज के लोग निकल गए। लेकिन हिंदुस्तानी और बांग्लादेशी नहीं निकले।”
– “इसके बाद कंपनी मालिक ने केटरर को बुलाया जो उनको खाना खिलाता था। केटरर ने बताया कि एक दिन जब हिंदुस्तानी और बांग्लादेशी खाना खाने आ रहे थे तो उन्हें आईएसआईएस ने देख लिया। उन्होंने पूछा कि कौन हो। आतंकियों को हिंदुस्तानी और बांग्लादेशियों के बारे में बताया गया।”

हरजीत ने निकल जाने का जुगाड़ किया
– सुषमा के मुताबिक, ” आतंकियों ने कहा कि ये लोग यहां नहीं रहेंगे। इनको टेक्सटाइल फैक्ट्री ले जाओ। फैक्ट्री ले जाकर कहा कि हिंदुस्तानियों को अलग रख दो और बांग्लादेशियों को अलग। एक दिन उन्होंने कहा कि बांग्लादेशियों को इरबिल छोड़ आओ। केटरर ने बताया कि छोड़ने की जिम्मेदारी उसे दी गई। केटरर अपनी वैन में उन्हें इरबिल छोड़ने पर तैयार हो गया।”
– “पता नहीं हरजीत ने कुछ जुगाड़ किया, केटरर ने कंपनी के मालिक को कहा कि हरजीत को मुस्लिम नाम देकर बांग्लादेशियों के साथ निकाल दो। कंपनी मालिक ने कहा कि मेरे पास एक आदमी का फोन आया। उसने खुद को अली बताया। मालिक ने कहा कि मेरे यहां तो कोई अली नाम का लड़का काम ही नहीं करता। तो उसने कहा कि मैं वो हूं जिसको बांग्लादेशियों के साथ निकालना है।”
– “केटरर ने बताया कि वह अली बनाकर हरजीत को इरबिल छोड़कर आया।”

इरबिल नाके से हरजीत का फोन आया
– सुषमा ने बताया, “पहली बार हरजीत का इरबिल नाके से फोन आया। वो पंजाबी में बात कर रहा था। मैंने उससे पूछा- कहां पहुंचे थे। उसने कहा- मुझे नहीं पता। बस ये कहा कि मुझे निकाल लो। मैंने कहा- बेटा, मैं तुम्हें जरूर निकाल लूंगी। लेकिन ये बताओ कि तुम यहां पहुंचे कैसे। तब भी उसने यही कहा कि मुझे नहीं पता।”
– “बाद में उसने ये कहानी गढ़ी कि सबको जंगल में ले जाया गया और एक कतार में खड़ा कर दिया गया और गोली मार दी। 39 के सिर में गोली लगी तो किसी को कहीं। हरजीत ने ये भी बताया कि उसे पैर में गोली लगी। उसकी कहानी सच नहीं थी।”

38 लोगों के डीएनए मैच हुए
– सुषमा ने कहा, “डीएनए टेस्ट में सबसे पहले संदीप नाम के लड़के का पता चला। 38 अन्य लोगों के डीएनए मैच होने के पता चला। एक लड़के के डीएनए इसलिए मैच नहीं हो पाया क्योंकि उसके माता-पिता नहीं थे

Advertisements

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *