BHAGALPUR

ऑपरेशन के दौरान मासूम की मौत हंगामा, क्लिनिक से भागे डॉक्टर

आदमपुर थाना के हनुमान नगर मोहल्ले में स्थित चंद्रा देवकी क्लिनिक में शुक्रवार को चिकित्सक की लापरवाही से एक वर्ष के बच्चे की मौत हो गयी. घटना के बाद परिजनों ने हंगामा शुरू किया तो चिकित्सक और क्लिनिक के स्टाफ भाग खड़े हुए. मामले की जानकारी मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची.

 

परिजनों का आरोप है कि, दो घंटे तक डाॅक्टरों ने मासूम वेद की मौत की बात छिपाये रखी. अंत में मृत बच्चे को शिशु रोग विशेषज्ञ के पास भेज दिया गया. हंगामे के बीच स्थानीय लोग भी क्लिनिक में जमा हो गये. उधर घटना के बाद अपने सालभर के बेटे की मौत के बाद मां नेहा भट्टाचार्य का रो-रोकर बुरा हाल है.

 

दाे घंटे के बाद चिकित्सक बोले शिशु रोग विशेषज्ञ के पास ले जाएं

 

इशाकचक लालूचक निवासी दवा कारोबारी संजय भट्टाचार्य की बहन शिल्पी अपने एक साल के भतीजे वेद को लेकर क्लिनिक आयी थी. शुक्रवार को इसके सिर पर बढ़े मांस का ऑपरेशन होना था. कागजी प्रक्रिया के बाद परिजनों से साढ़े ग्यारह हजार रुपये लिया गया.

दवाई का दाम अलग से लिया गया. ऑपरेशन के बीच करीब दो घंटे के बाद अचानक चिकित्सक सामने आये और कहा बच्चे को किसी शिशु रोग विशेषज्ञ के पास ले जाना होगा. आनन-फानन में वेद काे शिशु रोग विशेषज्ञ के पास ले जाया गया. जहां इसकी मौत होने की बात कह वापस भेज दिया गया. परिजन लाश लेकर चंद्रा देवकी क्लिनिक आ गये. यहां उन्होंने जमकर हंगामा किया. इस दौरान क्लिनिक के स्टाफ और डॉक्टर मौके से भाग निकले.

 

परिजनों का आरोप, जानबूझ कर मार दिया गया मेरे बच्चे को

 

पिता संजय भट्टाचार्य ने बताया कि, इलाज में घोर लापरवाही बरती गयी है. ऑपरेशन करने से पहले बच्चे को बेहोशी की दवा दी गयी. दवा का ज्यादा प्रयोग किया गया. ऑपरेशन के बाद उनके बच्चे को होश ही नहीं आया. अप्रैल माह से हम अपने बच्चे का इलाज डॉ रघुवंश के पास करा रहे थे.

 

बच्चे के सिर का मांस बढ़ गया था और लगातार उसकी दवा चल रही थी. अंत में दो दिन पहले उनसे कहा गया कि, छोटा सा ऑपरेशन है, इसे करना जरूरी है. मामूली ऑपरेशन होने की बात पर वे लाेग राजी हो गये. शुक्रवार को ऑपरेशन होना था. बारह बजे आये. तीन बजे ऑपरेशन शुरू किया गया. दो घंटे के बाद अचानक डॉक्टर सामने आये और कहा कि बच्चे का बीपी खत्म हो रहा है. इसको किसी बच्चे के डॉक्टर के पास जल्द से जल्द ले जाना होगा. सारा खर्च हम देंगे. वजह पूछा तो उन्हें कुछ भी नहीं बताया गया और आनन-फानन में हमें शिशु रोग विशेषज्ञ के पास भेज दिया गया. वहां चिकित्सक ने वेद को देखते ही मृत घोषित कर दिया.

 

देर शाम तक पुलिस को नहीं दी गयी थी लिखित शिकायत

 

परिजनों ने बताया कि, बच्चे का शव लेकर जब तक वापस डॉ रघुवंश के पास आये और सवाल पूछना शुरू किया तो डॉक्टर मौके से भाग निकले. कुछ ही देर बाद वहां के स्टाफ भी क्लिनिक को खुला छोड़ कर भाग गये. आगे उन्होंने कहा कि मौत के बाद क्लिनिक में कुछ लोग सामने आने लगे. ये लोग हमें किसी तरह से यहां से भगाने का प्रयास करने लगे. दूसरी ओर हंगामे की सूचना पर आदमपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची. देर शाम तक पुलिस को लिखित रूप में किसी ने डॉक्टर के खिलाफ शिकायत नहीं की थी. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस तैनात रही. वहीं चिकित्सक डॉ रघुवंश सिंह ने मौत को लेकर कुछ भी बताने से सीधे इंकार कर दिया.

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