कभी चाय बेच करते थे गुजारा, आज पीएम और प्रेसिडेंट के घर में सजती हैं इनकी पेंटिंग

पटना. महेश पंडित मूल रूप से वैशाली के रहने वाले हैं। पोट्रेट-पेंटिंग में मुकाम हासिल कर चुके महेश मजदूरी के लिए दिल्ली गए थे। पटना में उन्होंने सिटी भास्कर से शेयर किया सफरनामा। 8 जुलाई को नई दिल्ली में चित्रकार महेश पंडित ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को उनका पोट्रेट भेंट किया। अपना सजीव-सा पोट्रेट देखकर मुख्यमंत्री बेहद खुश हुए और महेश की चित्रकला की प्रशंसा की। महेश देश के कई नामचीन हस्तियों की पोट्रेट बना चुके हैं। उनकी कला के प्रशंसकों में कई राज्यों के सीएम समेत कई वीवीआईपी शामिल हैं। महेश की कला के प्रशंसकों में पीएम से लेकर राष्ट्रपति तक हैं। वह प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पेंटिंग और पोट्रेट भेंट कर चुके हैं।

पेंटिंग देख भावुक से हो गए थे प्रधानमंत्री मोदी
अपनी कला के बारे में महेश पंडित बताते हैं कि 21 मई 2015 को प्रधानमंत्री मोदी और वित्तमंत्री अरुण जेटली को उनके आवास पर पेंटिंग भेंट कर चुका हूं। अरुण जेटली के घर पर मोदी जी डिनर पर आए थे, इसमें मैंने जब प्रधानमंत्री को पेंटिंग भेंट की तो वह बेहद खुश हुए। पेंटिंग में मोदी जी को उनकी मां प्रसाद खिला रही हैं और इसके ऊपर एक कोने में मोदी जी प्रधानमंत्री की शपथ लेते दिख रहे हैं। इसे देख वह भावुक से हो गए और मेरी खूब तारीफ की। वह कहते हैं कि 26 अप्रैल 2018 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पोर्ट्रेट पेंटिंग भेंट कर कर चुका हूं। राष्ट्रपति ने भी इसे देख खुशी जताई और मेरी कला की तारीफ की। महेश इससे पहले आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू को उनके माता – पिता की पोर्ट्रेट भेंट कर चुके है। इसके साथ ही कई अन्य सेलिब्रेटी और नामचीन शख्सियतों को पोट्रेट भेंट किया है।

महज छठी क्लास तक पढ़ाई की है महेश ने
घर में आर्थिक तंगी के कारण बचपन में ही महेश को बाल मजदूरी करनी पड़ी। ईंट भट्टे पर महज 13 साल की उम्र में उन्होंने मजदूरी की। इसी बीच 1994 में करीब 14 वर्ष की उम्र में वह दिल्ली चले गए, जहां पेट पालना भी मुश्किल था। वह बताते हैं कि मैं गुड़गांव में ट्रेजरी ऑफिस के बाहर बैठा रहता। एक दिन मुझे देखकर आॅफिस के बाबुओं ने पूछताछ की और मेरी स्थिति जानने के बाद यहीं पर चाय का स्टॉल खोलने की सलाह दी। उनकी मदद से मैंने चाय बेचना शुरू किया और करीब चार साल तक यहां चाय बेचता रहा। इस दौरान जब मेरे हाथ में कुछ पैसे आने लगे तो मैं कागज और कलर खरीद कर पेंटिंग करने लगा। काम से फुर्सत मिलते ही पेंटिंग के अपने शौक में लगा रहता। चार साल चाय बेचने के बाद कुछ पोट्रेट या पेंटिंग बनाकर पेट पालने लगा और चाय बेचना छोड़ दिया। शुरू में चाय से होने वाली इनकम से भी कम आमदनी होती। ऐसे ही एक दिन मैं जिस बरामदे में रहता था वहां पेंटिंग बना रहा था तब एक मैडम गुजरी और उसे देखकर काफी प्रभावित हुई। उन्होंने मुझसे 30 पेंटिंग बनवाई। कुछ दिनों बाद गुड़गांव में लगे एक एग्जीबिशन में मेरी पेंटिंग पहले ही दिन चार हजार में बिक गई। इसके बाद मैंने पेंटिंग को ही अपना करियर बना लिया।

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