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कर्नाटक में BJP को सरकार बनाने का न्योता, कांग्रेस बोली- अब हमारे पास 2 रास्ते

कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला के बीजेपी को सरकार बनाने का मौका देने के बाद कांग्रेस ने इसे अनुचित कदम बताया है. कांग्रेस नेताओं ने इसके बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कहा कि उन्हें पता चला है कि गवर्नर ने बीजेपी को सरकार बनाने का मौका दिया है.

 

इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेसी नेता कपिल सिब्बल ने कहा है कि उनके पास दो विकल्प हैं कि वे इस मामले को लेकर राष्ट्रपति के पास जाएं या कोर्ट में. पार्टी नेता इस बारे में विचार करेंगे कि कौन सा कदम उठाया जाना चाहिए. आपको बता दें कि बुधवार देर शाम सामने आए घटनाक्रम में राज्यपाल की ओर से बीएस येदियुरप्पा को सरकार बनाने का मौका देने की बात सामने आई. उन्हें बहुमत साबित करने के लिए 21 मई तक का समय दिया गया है.

 

उधर, इस मामले पर कर्नाटक में मौजूद पार्टी के सीनियर नेता अशोक गहलोत ने कहा कि राज्यपाल पर बीजेपी अध्यक्ष और पीएम का दबाव है. उन्होंने आरोप लगाया कि कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला दबाव में काम कर रहे हैं. गहलोत ने कहा कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह गुजरात में राज्य सभा चुनाव में मिली हार का बदला लेने की भावना से काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि बहुमत कांग्रेस के साथ है तो इस लिहाज से उन्हें ही सरकार बनाने का मौका मिलना चाहिए.

 

कांग्रेस की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस में चिदंबरम ने कहा कि राज्यपाल को कानूनसम्मत कदम उठाना चाहिए. उन्होंने कहा कि हमारे पास बहुमत होने के बावजूद हमें सरकार बनाने का मौका नहीं दिया गया. हमने राज्यपाल से मिलकर उन्हें विधायकों के समर्थन की चिट्ठी भी सौंपी थी. हमने इसके साथ ही उन्होंने गोवा के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश की कॉपी भी दी थी, जो कि कानून भी है. हमें उम्मीद है कि कानून को नहीं बदला जाएगा.

 

कांग्रेसी नेता विवेक तन्खा ने कहा कि मुझे लगता है कि बीजेपी को पोचिंग का मौका मिल रहा है. राज्यपाल को सिद्धांतों के आधार पर फैसला करना चाहिए. इस दौरान कपिल सिब्बल ने कहा कि मन की बात अब धन की बात हो गई है. संविधान का इतना पतन पहले कभी नहीं हुआ. कर्नाटक का नाटक, इसका एक छोटा सा प्रतीक है.

 

आपको बता दें कि मंगलवार को सामने आए कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजों में 104 सीटों के साथ बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जबकि कांग्रेस को 78 और जेडीएस को 37 सीटें मिलीं. इसके अलावा बहुजन समाज पार्टी और कर्नाटक प्रज्ञयवंथा जनता पार्टी को क्रमशः 1-1 सीटें मिली हैं. इनके अलावा एक सीट अन्य के हिस्से में भी आई है. कर्नाटक में 222 सीटों पर मतदान हुआ था, इस हिसाब से बहुमत के लिए 112 विधायकों का समर्थन ही चाहिए.

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