एनएचएम के संविदा स्वास्थ्य कर्मियों को सरकार ने खुशखबरी देने के साथ ही कार्रवाई करने का भी फरमान सुना दिया है. स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव आरके महाजन ने गुरूवार को बताया कि राज्य में एनएचएम के मात्र 17 हजार स्वास्थ्य कर्मी विभिन्न पदों पर कार्यरत हैं.

संविदा पर कार्यरत एनएचएम कर्मियों को किसी भी हालत में स्थायी नौकरी नहीं दी जाएगी क्योंकि एनएचएम पर 60 प्रतिशत राशि भारत सरकार और 40 प्रतिशत राशि बिहार सरकार खर्च करती है. संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की कई मांगों पर प्रधान सचिव ने सहमति जताते हुए फाइनल चेतावनी भी दी है कि कल यानि शनिवार तक अगर हड़ताल खत्म कर स्वास्थ्य कर्मी काम पर नहीं लौटते हैं तो शनिवार से इनकी संविदा को समाप्त कर सेवा खत्म कर दी जायेगी.

इसके लिए सभी जिले के डीएम और सिविल सर्जन को आदेश दे दिया गया है. आरके महाजन ने यह भी कहा कि जो कर्मी कार्य बाधित करेंगे उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई होगी. बिहार में संविदा पर कार्यरत आयुष चिकित्सक,हेल्थ मैनेजर ,पारामेडिकल स्टाफ,एएनएम,बीसीएम और डीसीएम पिछले 4 दिसंबर से हड़ताल पर हैं.

सरकार ने कर्मियों के कुछ मांगों पर सहमति जताते हुए उसे लागू करने की बात कही. जो कर्मी 3 वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके हैं उनके मानदेय में 10 प्रतिशत वृद्धि और जो कर्मी 5 वर्ष सेवा पूर्ण कर चुके हैं उनके मानदेय में 15 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी. इसके साथ ही कर्मियों को अतिरिक्त कार्य करने पर अलग से प्रोत्साहन राशि दी जाएगी.

महाजन ने कहा कि संविदाकर्मियों की संविदा अवधि को विस्तार कर तीन वर्ष तक किया जाएगा साथ ही 60 की जगह 65 वर्ष तक संविदा कर्मियों की सेवा ली जाएगी.

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