सिक्किम में चीन, जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान के साथ तनाव के बीच सशस्त्र बलों को जवानों की कमी का सामना करना पड़ रहा है. रक्षा राज्य मंत्री सुभाष भामरे ने शुक्रवार को लोकसभा में इसकी जानकारी दी. जूनियर कमिशन के रैंकों में 52,000 से अधिक कार्मिक अधिकारियों, नाविकों और वायुसैनिकों की कमी है. सबसे ज्यादा सेना में 25,472 जवानों की कमी है. वायुसेना (13,785) और नौसेना (13,373) में भी जवानों की कमी है.

रक्षा राज्यमंत्री ने कहा, ‘सरकार ने सुरक्षा जवानों की कमी घटाने के लिए कई कदम उठाए हैं. इनमें प्रशिक्षण क्षमता में वृद्धि, निरंतर छवि निर्माण, स्कूलों में प्रेरक व्याख्यान, करियर संबंधी मेले और प्रदर्शनियों में भागीदारी और सशस्त्र सेनाओं में चुनौतीपूर्ण करियर का फायदा उठाने के प्रति युवाओं को जागरूक करने के लिए प्रचार अभियान शामिल हैं.’

इससे पहले संसद में रखी गई नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में बताया गया कि कोई युद्ध छिड़ने की स्थिति में सेना के पास महज 10 दिन के लिए ही पर्याप्त गोला-बारूद है. कैग की रिपोर्ट में कहा गया कुल 152 तरह के गोला-बारूद में से महज 20% यानी 31 का ही स्टॉक संतोषजनक पाया गया, जबकि 61 प्रकार के गोला बारूद का स्टॉक चिंताजनक रूप से कम पाया गया.

यहां गौर करने वाली बात यह है कि भारतीय सेना के पास कम से कम इतना गोला-बारूद होना चाहिए, जिससे वह 20 दिनों के किसी सघन टकराव की स्थिति से निपट सके. हालांकि इससे पहले सेना को 40 दिनों का सघन युद्ध लड़ने लायक गोलाबारूद अपने वॉर वेस्टेज रिजर्व (WWR) में रखना होता था, जिसे 1999 में घटा कर 20 दिन कर दिया गया था. ऐसे में कैग की यह रिपोर्ट गोलाबारूद की भारी किल्लत उजागर करती है.

कैग की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2016 में कुल 152 तरह के गोला-बारूद में केवल 31 ही 40 दिनों के लिए, जबकि 12 प्रकार के गोलाबारूद 30 से 40 दिनों के लिए, वहीं 26 प्रकार के गोलाबारूद 20 दिनों से थोड़ा ज्यादा वक्त के पर्याप्त पाए गए.

एक और सवाल के जवाब में, मंत्री ने कहा कि 2014 से 2016 तक सेना में 245 महिला अधिकारियों की भर्ती की गई, वायुसेना में 486 की भर्ती हुई जबकि नौसेना में इस दौरान 135 महिलाओं अधिकारियों को भर्ती किया गया.

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