जेल में बंद पूर्व सांसद बोले, अच्छा होता हम लोगों को फांसी या गोली मार दी जाती, जानें पूरी बात

बिहार के सहरसा जिले के मंडल कारा में मानवाधिकार का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है और सरकार मूकदर्शक बनी हुई है. जी हां, इससे अच्छा होता कि हमें गोली मार दी जाती. गुरूवार को एक पुराने मामले में स्थानीय कोर्ट में पेशी के लिए पहुंचे जेल में बंद पूर्व सांसद आनंद मोहन ने पेशी के बाद स्थानीय मंडल कारा में व्याप्त भ्रष्टाचार व कुव्यवस्था पर प्रतिक्रिया देते हुए कैदियों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार को अबतक का सबसे अमानवीय व मानवाधिकार का हनन बताया. उन्होंने कहा कि वर्तमान मंडल कारा अधीक्षक द्वारा जिस तरह से जेल मरम्मती के नाम पर पिछले दिनों पूर्णिया मंडल कारा भेज कैदियों को प्रताड़ित किया गया. वहां पहुंचने के बाद उन पर लाठियां बरसाई गयी, यह एक जेल अधीक्षक द्वारा खुलेआम कैदियों के साथ मानवाधिकार का हनन करने की बात है.

 

उन्होंने कहा कि जेल मरम्मत के नाम पर बिना टेंडर के लूट को अंजाम दिया गया. पूर्व सांसद ने कहा कि मरम्मती का काम तो मंडल कारा पूर्णिया में चल रहा था. जहां पहले से चौदह सौ कैदी थे. उसके बावजूद तीन सौ कैदी को सहरसा जेल से चुन चुन कर तेरह अगस्त की सुबह पौने चार बजे बिना नित्य क्रिया कराये लुंगी गंजी में ही पूर्णिया जेल भेज दिया गया. उन्होंने कैदियों को डरा धमका के उनका दोहन कर चालीस से पचास लाख की जबरन उगाही का कारा अधीक्षक पर आरोप लगाया. उन्होंने मंडल कारा अधीक्षक पर आरोप लगाते हुए जेल में बंद बबुआ झा को कान में दर्द होने की शिकायत पर उस कैदी के कान में तमाचा जड़ उसके कान का पर्दा फाड़ देने की बात कही.

 

उन्होंने कहा कि इस मामले में जिला जज द्वारा संज्ञान लेने और कैदी की अस्पताल में इलाज करवाने के आदेश के बावजूद उस कैदी का इलाज नहीं करा कारा अधीक्षक जिला जज के आदेश की भी अवहेलना कर रहे हैं. पूर्व सांसद ने कहा कि और भी कई ऐसे कैदी हैं. जिन्हें अस्पताल से इलाज के दौरान जेल भेज दिया गया. उन्होंने मंडल कारा अधीक्षक के खिलाफ राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को अपनी शिकायत में पूर्णिया भेजे गये कैदियों के सामान को जेल में लुटवाने व कुछ जरूरत की सामान को अपने सामने होलीका दहन करने का गंभीर आरोप लगाया है. पूर्व सांसद ने कहा कि मंडल कारा में सजा के तौर पर जिस गंदे व नक्सलाइट वार्ड में उन्हें रखा गया था. उनकी मेहनत से अब वही वार्ड अच्छा लग रहा है तो मुझ पर स्वर्ग में रहने व वार्ड पर कब्जा का आरोप लगाया जाता है.

 

उन्होंने कहा कि पूर्णिया जेल में अनशन के बाद जब वे सहरसा जेल लाया गया तो देखा जिस मरम्मती के नाम पर उन्हें अपने वार्ड से बाहर के जेल में भेजा गया, उस वार्ड में कोई भी मरम्मत का काम नहीं हुआ है. पूर्व सांसद ने कहा कि कोर्ट से अब वे फरियाद करेंगे कि इससे अच्छा उन्हें कोर्ट के बाहर फांसी दे दें या सरेआम गोली ही मरवा दें. उन्होंने कहा कि आजादी के सत्तर सालों में उन्होंने इस तरह का मानवाधिकार का हनन करते कभी किसी को नहीं देखा है. उन्होंने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से कैदियों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार व जेल मैनुअल की अनदेखी की शिकायत करते इसकी जांच की मांग की. पूर्व सांसद के साथ जेल में बंद अनिल कुमार यादव, अमरजीत यादव सहित एक दर्जन से अधिक कैदियों ने अपना हस्ताक्षर कर मंडल कारा अधीक्षक के खिलाफ राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से शिकायत कर जांच की मांग की है.

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