तस्करी की शराब ले सकती है आपकी जान

तस्करी की शराब ले सकती है आपकी जान

15th April 2018 0 By Kumar Aditya

बिहार में शराबबंदी के बाद भी चोरी-छुपे शराब पीने वाले सावधान हो जाएं. क्योंकि शराब तस्कर मुनाफाखोरी और शराबबंदी के डर को ढाल बनाकर आपको नकली शराब पिला रहे हैं. शराब तस्कर खुद ही नकली शराब बना रहे हैं. इनके लगातार सेवन करने से लिवर, किडनी के खराब होने के साथ ही अंधापन भी हाे सकता है. बिहार में आनेवाली नकली शराबों की बड़ी खेप हरियाणा, यूपी, पंजाब व पश्चिम बंगाल से आ रही है. हाल में पकड़ी गयी हरियाण निर्मित शराब की सैंपल की जांच रिपोर्ट में भी इसका खुलासा हुआ है कि इनमें स्टैंडर्ड अल्कोहल की मात्रा कम पायी गयी है. जानकारों के अनुसार इस कम स्ट्रेंथ वाले अल्कोहल की मात्रा वाली शराबी पीना जानलेवा साबित हो सकता है.

 

देखने में बिल्कुल असली दिखती है बोतल: शराब की बोतल को इस तरह से पैक किया जाता है कि देखने में यह बिल्कुल असली दिखती है. क्योंकि वह बोतल एकदम नयी होती है और पैकिंग कर अच्छे ढंग से सील लगी होती है. इसके अलावा कंपनी का जो रैपर लगा होता है, वह काफी चमकता रहता है. लेकिन यह ऑरिजिनल नहीं है, बल्कि शराब माफिया शराब की बोतलों का जुगाड़ कर उस पर किसी भी कंपनी का रैपर लगा कर पटना में शराब पहुंचा रहे हैं. जानकार बताते हैं कि जितनी मात्रा में शराब बरामद हो रही है, उस अनुपात में कंपनियों में शराब बनाना भी मुश्किल है. ऐसे में इनके नकली होने की आशंका और अधिक बढ़ जाती है.

 

हरियाणा, पंजाब, बंगाल व यूपी से आ रही नकली शराब, पीने से हो सकते हैं किडनी व लिवर खराब

तस्करों द्वारा बेची गयी नकली शराब के सेवन से सेहत तो बिगड़ती ही है, जान भी जा सकती है

उल्टी व कमजाेरी की भी शिकायत

 

शराब पीने के क्रम में पुलिस द्वारा पकड़े गये शराबियों से पूछताछ के बाद यह बात सामने आयी है कि उक्त

शराब पीने में टेस्ट में थोड़ा-बहुत अंतर रहता है, लेकिन वह पता नहीं चलता है. इसका असर अगले दिन देखने को मिलता है. क्योंकि सुबह से ही सिर में दर्द, उल्टी जैसा महसूस होना, गैस, कमजोरी आदि होने लगती है. इस तरह नकली शराब का लगातार सेवन करने से जान भी जा सकती है.

 

नकली शराब बनाना

मुश्किल भी नहीं है

 

बिहार में जब शराबबंदी नहीं थी तो भी उस समय नकली शराब बनाने वाले कई गिरोह का पर्दाफाश पटना पुलिस व उत्पाद विभाग ने किया था. स्टेशन गोलंबर के पास से एक ग्रुप पकड़ा गया था, जो पुरानी बोतल में ही स्प्रिट व अन्य सामग्री मिला कर शराब बना देता था और देर रात तक उसकी बिक्री करता था. इसके अलावा दानापुर के मैनपुरा में एक व्यक्ति किराये का कमरा लेकर अंग्रेजी शराब बनाता था. पुलिस ने जब वहां छापेमारी की थी, तो काफी संख्या में खाली बोतलें, रैपर व सील बंद करने की मशीन को बरामद किया था. इसके अलावा झारखंड में भी हाल में नकली शराब बनाने वाली एक फैक्ट्री पकड़ी गयी थी. इससे यह स्पष्ट है कि नकली शराब बनाना काफी मुश्किल काम नहीं है.

100 रुपये में बना कर

1200 में बेचते हैं तस्कर

 

खास बात यह है कि इन गिरोहों के पकड़े जाने के बाद पूछताछ में यह बात सामने आयी थी कि मात्र सौ रुपये के खर्च में किसी भी ब्रांड की अंग्रेजी शराब की बोतल आसानी से बना लेते हैं और उसे बाजार में उस समय छह गुना दामों में बेचते थे. जबकि अभी के समय में 12 गुना दामों पर बिक्री कर रहे हैं. मसलन सौ रुपये लागत में बनी शराब की बोतल अभी 12 सौ से 15 सौ रुपये में आसानी से बिकने की बात पुलिस के सामने आ चुकी है. अगर तस्करों के शराब की एक खेप को पुलिस ने पकड़ भी लिया, तो भी उन्हें बहुत नुकसान नहीं होता है, क्योंकि वह शराब मात्र सौ रुपये की लागत में बनी होती है. अगर उनकी एक खेप भी निकल गयी तो फिर वे मालामाल हो जाते हैं.

 

क्या कहते

हैं डॉक्टर

नकली

 

शराब से आंख, लिवर, किडनी व ब्रेन पर असर पड़ता है. लगातार सेवन से ये सभी डैमेज हो सकते हैं और जान भी जा सकती है.

-डाॅ मनोज कुमार, अधीक्षक, गार्डिनर अस्पताल

दो वर्षों में

 

हजार से अधिक शराब के मामले में है आरोपित, उत्पाद विभाग व थाने से होती है कार्रवाई

एक सप्ताह के भीतर दस आरोपितों को मिलेगी सजा

 

राज्य में शराब बंदियों की सजा देने की शुरुआत होने वाली है. बीते दो माह में लगातार सुनवाई और गवाहों की पेशी के बाद जिला में लगभग दस आरोपितों की सुनवाई लगभग पुरी हो चुकी है. बतौर जिलाधिकारी कुमार रवि के अनुसार अब तक चल रहे मामले का परिणाम दिखने वाला है. आरोपितों की सजा दिलाने के प्रयास

 

तेज कर दिये गये हैं. उत्पाद विभाग व पुलिस स्तर पर आरोपितों को पकड़ने के अलावा आरोपितों के सबूत व गवाह को भी तेज किया गया है. इस कारण अप्रैल माह में आरोपितों को सजा मिलने की शुरुआत हो जायेगी.

आरोपितों पर न्यायिक प्रक्रिया तेज

 

राज्य में शराबबंदी के दो वर्ष पूरे हो चुके हैं. इस दौरान अकेले पटना जिला में 15 हजार से अधिक लोग शराब पीने व उस से संबंधित मामले के आरोपित बनाये जा चुके हैं. जिलाधिकारी कुमार रवि के निर्देश पर बीते दो माह से इन आरोपितों को लेकर न्यायायिक प्रक्रिया तेज कर दी गयी है. सबूतों व गवाहों को पेश करने में उत्पाद विभाग व पुलिस विभाग के अधिकारियों को तेजी दिखाने का निर्देश दिया गया है. बीते दो माह में जिलाधिकारी स्तर पर शराबबंदी को लेकर लगभग एक दर्जन बार बैठकें हो चुकी हैं.

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