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दुश्मन देश होशियार, भारतीय सेना आज मिलने जा रहा है ये खास हथियार

New Delhi: Prime Minister Narendra Modi during celebrations of 125th anniversary of Swami Vivekananda's Chicago Address, in New Delhi on Monday. PTI Photo by Shahbaz Khan (PTI9_11_2017_000054A)

भारतीय सेना और देश के लिए अच्छी खबर है। भारतीय सेना को पिछले 31 साल से जिस हथियार का इंतजार था उसे वो आज मिलने जा रहा है। भारतीय सेना के बेड़े में आज 3- एम-777 अल्ट्रालाइट होवित्जर तोप और 3 बख्तरबंद तोप के-नौ वज्र बख्तरबंद तोप शामिल होने जा रहा है। भारतीय सेना को इन तोपों के मिलने के बाद ऐसा कहां जा रहा है कि इससे सेना के जवानों की ताकत बढ़ जाएंगी।
महाराष्ट्र के नासिक स्थित देवलाली में होने वाले एक भव्य समारोह में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत भी मौजूद रहेंगे। बोफोर्स के बाद 31 सालों में भारतीय सेना को यह पहली तोप मिलेगी। के-9 बज्र को साउथ कोरिया की कंपनी हनवहा टेक विन ने मेक इन इंडिया के तहत तैयार किया है। भारत में इस बख्तरबंद तोप का निर्माण एलएंडटी करेगी। वर्ष 2020 तक 100 के-9 वज्र आर्टीलरी तोप भारतीय सेना के पास होंगी।

कुल 4500 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट के तहत सेना को 10 तैयार तोपें मिलेंगी, जबकि 90 का निर्माण मेक इन इंडिया के तहत होगा। यह तोप तीन सेकेंड में तीन गोले दागने में सक्षम है। न्यूक्लियर वारफेयर केमिकल से निपटने के लिए सीबीआरएन तकनीक से यह तोप लैस है। यह बख्तरबंद तोप 60 किलोमीटर प्रतिघंटे की गति से दौड़ सकती है। तो रेगिस्तानी इलाकों में भी चल सकती है। इस वजह से यह तोप भारत पाक की राजस्थान और पंजाब सीमा पर बहुत प्रभावी होगी।

एम 777 अल्ट्रालाइट होवित्जर तोप है। यह प्रोजेक्ट पांच हजार करोड़ रुपये का है। भारतीय सेना की आर्टीलरी रेजीमेंट में वर्ष 2021 तक कुल 145 एम-777 अल्ट्रालाइट होवित्जर शामिल होंगी। इसका वजन केवल 4.2 टन है। इसलिए इसे चीनूक हेलीकॉप्टर और ट्रांसपोर्ट विमान से हाई एल्टीटयूट और दूसरी एरिया में तैनात किया जा सकता है। कारगिल युद्ध के बाद सबसे ज्यादा कमी हाई एल्टीट्यूट वारफेयर की थी। यह तोप 31 किमी तक एक मिनट में चार राउंड फायर कर सकता है। इसका गोला 45 किलो का है। यह 155/39 एमएम की तोप है। इसे चलाने के लिए आठ जवान तैनात होंगे।

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