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नालंदा में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, धम्म सम्मेलन का किया उद्घाटन

महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद दिल्ली से विशेष विमान से गया एयरपोर्ट पहुंचे जहां बिहार के राज्यपाल सतपाल मलिक और सीएम नीतीश कुमार ने उनका स्वागत किया। गया के बाद महामहिम राजगीर पहुंचे।

 

 

 

राष्ट्रपति ने बिहारशरीफ के राजगीर स्थित अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन हॉल में अंतरराष्ट्रीय धम्म महासम्मेलन का उद्घाटन किया, इसमें राष्ट्रपति सहित 11 बौद्ध देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए हैं। सम्मेलन को संबोधित करते हुए सीएम नीतीश कुमार ने आयोजनकर्ताओं को धन्यवाद दिया।

 

 

 

उन्होंने अतर्राष्ट्रीय नालंदा विश्वविद्यालय को प्राचीन बताते हुए कहा कि विलुप्त हो चुके प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के गरिमा के अतीत की पुनः वापसी करने हेतु भूतपूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की

 

अनुसंशा से पुनर्जीवित किया।

 

 

 

प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के भग्वनावशेष को विश्व धरोहर में शामिल करने हेतु बिहार सरकार ने प्रयास किया

 

अंतर्राष्ट्रीय नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति से कहा कि पुरातात्विक महत्व से लबरेज पूरे राजगीर को विश्व धरोहर में शामिल कर लिया जाये। पुरातात्विक महत्व से लबरेज पूरे राजगीर को विश्व धरोहर में शामिल कर लिया जाये कम्फ्लिक्ट रेजोल्यूशन सेंटर का निर्माण हो बिहार में।

 

 

 

-राजगीर के अंतरराष्ट्रीय क्वेश्चन सेंटर में आयोजित होने वाले तीन दिवसीय धर्म- धम्म सम्मेलन में भाग लेने पहुंचे महामहिम राष्ट्रपति, राज्यपाल व सीएम।

 

-मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, श्रीलंका के विदेश मंत्री तिलक मारापना और थाइलैंड के संस्कृति मंत्री वीरा रोजपालेजचानरत विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद

 

-नालंदा विवि की कुलपति प्रो सुनैना सिंह ने राष्ट्रपति को बुके और मोमेंटो दे अतिथियों का किया स्वागत

 

-विदेश मंत्रालय के पूर्व जोन की सचिव प्रीति शरण ने स्वागत भाषण पढ़ा

 

 

 

राष्ट्रपति बिहार में गया एयरपोर्ट पर आकर हेलीकॉप्टर से राजगीर रवाना हुए पुन: देर शाम राजगीर से गया आकर नई दिल्ली के लिए प्रस्थान कर जाएंगे। गया हवाई अड्डे पर राष्ट्रपति का स्वागत करने के लिए राज्यपाल सत्यपाल मलिक व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मौजूद रहे।

 

 

 

तीन दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन का उद्देश्य धार्मिक परंपरा को जागृत करना है, क्योंकि धम्म शांति का एक प्रमुख स्रोत है। पूरी दुनिया में जहां शांति का मार्ग तलाशने की व्याकुलता छायी है उस परिपेक्ष्य में यह सम्मेलन वैश्विक शांति के मार्ग में एक बड़ा कार्य कहा जा सकता है।

 

 

 

आसियान-भारत वार्ता भागीदारी की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर यह सम्मेलन आयोजित किया गया है। मालूम हो सिंगापुर में चौथा आसियान शिखर सम्मेलन 28 जनवरी 1992 को हुआ था। आसियान और भारत के बीच शांति वार्ता साझेदारी स्थापित करने के लिए एक निर्णय लिया गया था। तब से यह वर्ष गांठ निरंतर मनाया जा रहा है।

 

 

 

दुनिया के 11 देशों की सक्रियता ने आसियान-भारत वार्ता की 25वीं वर्षगांठ की श्रेष्ठता को सिद्ध कर दिया है। इस विशेष अवसर पर देश-दुनिया से आए दर्जनों चिंतकों द्वारा धम्म का विश्लेषण किया जाएगा।

 

 

 

इस मौके पर जहां विश्वविद्यालय के छात्र अपने शोध-पत्र शामिल करेंगे वहीं धर्म और धम्म की भी सही व्याख्या को तार्किक तरीके से प्रस्तुत किया जाएगा।

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