Bihar NATIONAL Politics

नीतीश कुमार को शराबबंदी के लिए प्रेरित करने वाली महिलाओं से बात करेंगे पीएम मोदी

सुषमा ने अपने सेल्फ हेल्फ़ ग्रुप की बहनों की मदद से ना सिर्फ अपने परिवार के अंदर, बल्कि गांव में भी इसको लेकर मोर्चा खोला और सफलता पाई.
पटना : तमाम सामाजिक और राजनीतिक विरोधों के बीच बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कैबिनेट की बैठक में शराबबंदी के कानूनों में बदलाव कर उसे पहले से लचीला बना दिया है. बिहार में शराबबंदी के पीछे जिन महिलाओं ने लड़ाई लड़ी उन्हें आज भी लगता है कि शराबबंदी ने उन्हें ना सिर्फ केवल सामाजिक रूप से सबल बनाया, बल्कि वह आर्थिक रूप से भी पहले से ज्यादा मजबूत हैं. आज (गुरुवार को) ये महिलाएं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात करेंगी और अपनी कहानी बताएंगी.

पटना से करीब 50 किलोमीटर दूर नालंदा जिले के रहुई ब्लॉक के खाजे इतवार सराय गांव की सुषमा को आज भी वो दिन याद है, जब पहली बार पति और घरवालों की वजह से शराब बंद करवाने के लिए उसने आवाज उठाई थी. उसपर जानलेवा हमला भी हुआ था. फिर भी अपने संकल्प से पीछे नहीं हटी और डटी रही.

सुषमा ने अपने सेल्फ हेल्फ़ ग्रुप की बहनों की मदद से ना सिर्फ अपने परिवार के अंदर, बल्कि गांव में भी इसको लेकर मोर्चा खोला और सफलता पाई. सुषमा और उसके साथियों को जरूरत थी उनके आंदोलन को कानूनी जामा पहनाने की. इसके लिए राज्य सरकार की दखल की जरूरत थी.

नौ जुलाई 2015 के दिन पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में ‘मद्य निषेध दिवस’ के मौके पर हुए एक समारोह में स्वयं सहायता समूह की कुछ महिलाओं ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अपने कड़वे अनुभव सुनाए थे. इस समारोह में पहुंची हजारों औरतों ने एक साथ आवाज लगाई थी, ‘मुख्यमंत्रीजी शराब को बंद कराइए, इससे हजारों घर-परिवार बबार्द हो रहे हैं’. नीतीश कुमार ने उसी समय एलान कर दिया था कि अगर वे दोबारा सत्ता में आएंगे, तो शराब पर पूरी तरह से पाबंदी लगा देंगे.

आज इन्हीं महिलाओ के मेहनत और जब्बे का नतीजा था कि सरकार में आते ही नीतीश कुमार ने शराबबंदी की घोषणा की और उनकी उसी सफल प्रयासों को प्रधानमंत्री गुरुवार को सुनेंगे. महिलाओं का मानना है कि अगर प्रधानमंत्री उनकी मन की बात पूछें तो देशभर में शराबबंदी की वकालत करेगी.

Advertisements

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *