पटना एयरपोर्ट : कुल क्षमता पांच लाख, एक साल में ही बढ़ गये 10 लाख हवाई यात्री

वित्तीय वर्ष 2016-17 में पटना आने वाले हवाई यात्रियों की संख्या 21.12 लाख थी, जो बीते वित्तीय वर्ष 2017-18 में बढ़ कर 31 लाख पर पहुंच गयी है. एक वर्ष के भीतर हवाई यात्रियों की संख्या में प्रदेश में 10 लाख की वृद्धि हुई है. चार दशक पहले बने पटना एयरपोर्ट के वर्तमान टर्मिनल भवन की क्षमता पांच लाख यात्री सालाना की है. ऐसे में तेजी से बढ़ रहे हवाई सेवा के उपभोग की प्रवृति को देखते हुए प्रदेश में हर वर्ष पटना एयरपोर्ट जैसे दो नये एयरपोर्ट के निर्माण की जरूरत है. हवाई यात्रियों की बढ़ती हुई मांग को तभी पूरा किया जा सकता है.

-2016-17 में पटना

 

आने-जाने वाले हवाई यात्रियों की संख्या बढ़ कर हुई 21 से 31 लाख

-33 से 47 फीसदी पर पहुंचा पैसेंजर ग्रोथ

 

नया टर्मिनल भवन भी नहीं संभाल पायेगा बढ़ा एयर ट्रैफिक लोड

 

पटना आने जाने वाले हवाई यात्रियों की संख्या में तेज वृद्धि को देखते हुए 800 करोड़ की लागत से 45 लाख सालाना यात्रियों की क्षमता वाले 57 हजार वर्गमीटर में विशाल नये टर्मिनल बिल्डिंग के निर्माण का प्रस्ताव स्वीकृत हुआ है. लेकिन यह टर्मिनल बिल्डिंग भी बढ़ती हुई जरूरत को पूरा नहीं कर सकेगा. तीन साल इसके निर्माण में लगेंगे और पिछले वित्तीय वर्ष (47 फीसदी) या उससे पहले का वृद्धि दर भी (33 फीसदी) जारी रही, तो इसका निर्माण पूरा होते-होते 70 से 90 लाख के बीच पटना एयरपोर्ट से आने जाने वाले हवाई यात्रियों की संख्या पहुंच जायेगी. ऐसे में उद्घाटन के दिन से ही इस पर क्षमता से डेढ़ से दोगुने तक यात्रियों का लोड होगा और अगले दो-तीन वर्षों के भीतर ही पटना एयरपोर्ट का नया टर्मिनल भी ओवर क्राउडिंग का शिकार हो जायेगा.

 

पटना व बिहटा एयरपोर्ट की संयुक्त क्षमता से भी अधिक होगा लोड

 

एयरपोर्ट ऑथिरिटी ऑफ इंडिया ने राज्य सरकार के सहयोग से बिहटा एयरफोर्स स्टेशन में भी 800 करोड़ रुपये खर्च करके 25 लाख की क्षमता वाला विशाल सिविल इनक्लेव बनाने और वहां से नागरिक उड्डयन शुरू करने का निर्णय किया है. बिहटा एयरपोर्ट का निर्माण 2022 तक पूरा होगा. तब तक पटना से आने-जाने वाले हवाई यात्रियों की संख्या एक करोड़ सालाना को पार कर जायेगी, जो पटना और बिहटा दोनों एयरपोर्ट की संयुक्त यात्री क्षमता 70 लाख से अधिक होगी.

 

एयरपोर्ट प्रोजेक्ट को जल्द पूरा करने की जरूरत

 

नालंदा में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाने की चर्चा पिछले पांच-छह महीने से की जा रही है. लेकिन अभी तक यह प्रस्ताव ठोस रूप नहीं ले पाया है. वहां कम-से-कम 50 लाख सालाना क्षमता का एयरपोर्ट बनाने की जरूरत है, ताकि मध्य बिहार के लोग राष्ट्रीय के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए भी इसका इस्तेमाल कर सकें.

 

मुुुजफ्फरपुर, पूर्णिया और भागलपुर में सुविधा जरूरी

 

पटना एयरपोर्ट पर भीड़ की एक बड़़ी वजह प्रदेश में पटना और गया को छोड़ अन्य जगहों से नागरिक उड्डयन की सुविधा नहीं होना है. इस कमी को महसूस करते हुए उड़ान टू में दरभंगा व किशनगंज को शामिल किया गया है. मुुुजफ्फरपुर, पूर्णिया और भागलपुर में भी विद्यमान एयरपोर्ट का विकास करने और बाकी 31 जिलों में भी एयरपोर्ट का निर्माण करने की जरूरत है.

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