राजधानी पटना के राजेंद्र नगर रोड नंबर दस के पीआरडी फ्लैट संख्या जेएफ1/4 में मानवता को शर्मसार करने वाली घटना को जिसने भी सुना उसकी रूह कांप गई। इस घटना के सामने आने के बाद रिश्ते-नाते से इंसान का विश्वास उठ जाएगा।

 

ये कहानी है 50 साल की एक बदनसीब महिला -मिली सरकार की, जिसके पति ने उसके साथ जन्म-जन्मांतर तक साथ निभाने का वादा किया था। दोनों की जीवन की गाड़ी सरपट दौड़ रही थी, दो बेटियों ने जन्म लिया तो मिली की जिंदगी में बहार आ गई। बेटियों के लालन-पालन और उनपर प्यार न्योछावर करना ही उसकी जिंदगी बन गई।

 

पति एके सरकार बिहार आयुर्वेदिक कॉलेज एंड हॉस्पिटल में पैथोलॉजिस्ट पद पर कार्यरत हैं। लेकिन शादी के कुछ सालों के बाद ही उनके रिश्ते में दरार आ गई और पति की पसंद कोई और बन बैठी। मिली सरकार ने बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली यूनिवर्सिटी में दाखिला दिलाया, बेटियां वहीं नौकरी करने लगीं और मिली अकेली रह गई।

 

लेकिन जब मिली को पता चला कि उसके पति को शराब की बुरी लत लग गई है और उसकी पसंद कोई और हो गई है तो वह अंदर से टूट गई। उसने पति से पूछताछ की तो पति नाराज हो गए और पत्नी को छोड़कर पटना के फुलवारीशरीफ में किसी और के साथ रहने लगे।

 

मिली की दोनों बेटियों ने शादी की जिससे मिली को खुशी मिली लेकिन पति के दिए जख्मों की वजह से उसकी तबियत खराब रहने लगी। बेटियों ने मां की देखभाल के लिए नौकरानी रख दी जो उसकी देखभाल करती थी।

 

पांच साल पहले मिली को डॉक्टरों ने एक गंभीर बीमारी बताई, जिससे वह दिन ब दिन कमजोर होती गईं। करीब डेढ़ साल से वह बेडसोल से पीडि़त थीं। उठकर पानी तक नहीं ले सकती थीं। नित्य-क्रिया भी बिस्तर पर होती। नौकरानी सुबह में आती थी। वह देखभाल करती और खाना खिलाने के बाद घर चली जाती थी।

 

बिस्तर पर तड़पती, दर्द से कराहती मिली सरकार को देख सबकी आंखें भर जातीं थीं। ऐसी जिंदगी को देख सब उनकी मौत की ही कामना करते थे। मंगलवार को जब नौकरानी काम पर आई तो मिली को बिस्तर में मृत पाया। इसकी जानकारी उसने पड़ोसियों को दी। पड़ोसियों ने उनके पति डॉक्टर एके सरकार को घटना के बारे में बताया।

 

पत्नी की मौत की खबर मिलने के बावजूद डॉक्टर सरकार उसे देखने नहीं आए। उन्होंने प्रदीप नामक दोस्त को घर भेजा और मिली का शव कॉफिन में रखवा दिया और उसने अपना मोबाइल फोन तक बंद कर लिया। गुरुवार तक जब कोई उनके शव का अंतिम संस्कार करने नहीं आया, तब पड़ोसियों ने इसकी सूचना कदमकुआं थाने को दी।

 

पुलिस के बुलावे पर उनकी दोनों बेटियां आईं तो तीन दिन तक लावारिश हालत में पड़े शव को उन्हें सौंपा गया। बुलाने के बावजूद भी मिली के डॉक्टर पति नहीं पहुंचे, जिन्होंने सात फेरे लेते वक्त जन्म-जन्मांतर तक साथ निभाने का वादा किया था।

 

थानाध्यक्ष अजय कुमार ने बताया कि डॉ. सरकार को कॉल की गई थी, लेकिन उन्होंने रिसीव नहीं किया। जानकारी मिलने के बाद देर शाम में उनकी दोनों बेटियों और दामाद पटना पहुंचे। बेटियों ने बताया कि कोहरे की वजह से दो दिन तक उन्हें ट्रेन नहीं मिली।

 

रिश्तों को शर्मसार करने वाली मिली सरकार की कहानी कोई नई नहीं है। रिश्तों के घुटन और समाज के नियम जिन बच्चों को पाल-पोसकर बड़ा किया उनकी ममता, एक औरत के लिए कुछ बचा नहीं रहता। एेसी ही एक दिल को झकझोर देने वाली घटना मुंबई के एक बंद फ्लैट में घटी थी जहां अकेली रह रही महिला की मौत के बाद उसका शरीर कंकाल में तब्दील हो गया और उसे देखने वाला कोई नहीं था। ये है हमारे बदलते एडवांस समाज का चेहरा।

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