पर्यावरण संकट और कैंसर का दावत है थर्मोकोल

सुपौल। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर स्वैच्छिक संस्था ग्राम्यशील द्वारा जिला मुख्यालय स्थित प्रखंड संसाधन केंद्र में शिक्षकों के साथ थर्मोकोल से पर्यावरण और मानव जीवन पर प्रभाव विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन कर थर्मोकोल के बढ़ते अंधाधुंध प्रयोग को अविलंब रोक लगाने की मांग की गई। थर्मोकोल से बने डिस्पोजेबल कप-प्लेट्स का इस्तेमाल कर कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को दावत दे रहे हैं। डिस्पोजेबल कप-प्लेट्स गर्म चीजों के संपर्क में आते ही इनमें इस्तेमाल बिसचेनोल केमिकल और रंग खाद्य वस्तुओं में घुलकर मनुष्य के पेट तक पहुंच जाता है। सबसे पहले व्यक्ति के गैस, एलर्जी, खून की उल्टी, सीने में दर्द, खांसी और सांस लेने में दिक्कत आ सकती है। पेट के कई और रोग इसके इस्तेमाल से हो सकते हैं। डिस्पोजेबल के अधिक इस्तेमाल से ये रोग 80 प्रतिशत तक कैंसर का खतरा बढ़ा देते हैं। ग्राम्यशील के चंद्रशेखर ने कहा कि पहले महत्वपूर्ण सामानों की पैके¨जग हो या शादी-ब्याह, त्योहार जैसे मौकों पर ही सजावट के लिये थर्मोकोल का इस्तोमाल होता था, लेकिन आज व्यापार में इसके अंधाधुंध प्रयोग के अलावा आज प्राय: छोटे-बड़े भोज, होटलों, ढाबों यहां तक कि पूजा पाठ, पर्व-त्योहार जैसे धार्मिक आयोजनों में भी थर्मोकोल डिस्पोजेबल का इस्तेमाल बेरोक-टोक हो रहा है। जिसका पर्यावरण और हमारे स्वास्थ्य पर घातक प्रभाव साबित हो रहा है। यह नदियों, झीलों और समुद्र के पानी पर भी बुरा असर डाल रहा है। चूंकि यह बायोडिग्रेडेबल नहीं है, जिसके कारण यह जहां कहीं भी कूड़े के रूप में फेंका जाता है, इसके छोटे छोटे टुकड़े जमीन, वायु और समुद्र को प्रदूषित करने का एक बड़ा कारण बन रहे हैं। जिससे मनुष्य ही नहीं बल्कि जानवरों, जीव-जन्तुओं के स्वास्थ्य पर इसका बुरा असर पड़ रहा है। प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी नरेंद्र झा ने इसे पूजा-पाठ, पर्व-त्योहार जैसे पवित्र आयोजनों में इसके इस्तेमाल को पाप की संज्ञा देते हुए इससे तत्काल मुक्त होने का आह्वान किया। कार्यक्रम में उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सलखुआ सहरसा के प्रधानाध्यापक अजीत ¨सह, प्रखंड संसाधन केंद्र के समन्वयक दिवाकर प्रसाद ¨सह, मध्य विद्यालय चकला निर्मली की शिक्षिका अंजना ¨सह, दयाराम यादव, श्याम सुंदर सुमन, मनोज कुमार चौधरी, श्वेता कुमारी, रूपक कुमार पांडे, शत्रुघ्न कुमार, मो. नसरूल्ला, रौनक ¨सह आदि ने भी चर्चा में भाग लिया।

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