पर्यावरण संरक्षण: रिटायरमेंट के बाद पेड़-पौधों के साथ जीवन की नई पारी

एयरफोर्स के फ्लाइंग आफिसर से रिटायरमेंट के बाद रवींद्र नाथ सिंह को पौधे से दोस्ती हो गई। बेटा राकेश लेफ्टिनेंट कॉर्नल बन गया और बेटी रंजना की शादी रांची में एक चिकित्सक के साथ हो गयी। पत्नी हीरामणि नौकरी के दौरान ही साथ छोड़कर चली गई। रिटायरमेंट के बाद आगे के जीवन पर उन्हें फैसला लेना कठिन था। बेटा अपने तो बेटी अपने पास रखना चाहती थी। दिल्ली में दो फ्लैट, ऐसी स्थिति में गांव में रहकर पौधरोपण का फैसला लिए।

 

अपनी जमीन पर पौधे लगाकर हरा-भरा बनाने का फैसला इलाहाबाद में नौकरी से रिटायरमेंट के पहले रवींद्र नाथ सिंह ले चुके थे। रिटायर हुए और सीधे बख्यिारपुर के रवाईच गांव में आ गए। कहते हैं कि गांव आए तो अपने खेतों में पौधरोपण शुरू करना चाहे। छह भाई हैं। जमीन का मामला उलझ गया। फैसला लिए हैं कि अपने हिस्से के सभी जमीन में पौधरोपण करेंगे। अब सिर्फ पौधे ही मेरी जीवन जीने का मकसद हैं। सुबह उठते ही पौधे की देखभाल शुरू कर देते हैं। कहते हैं कि मेरे जीवन में सिर्फ पत्नी की कमी खली। पेड़-पौधे की दुनिया में रहने के कारण इस कमी को भूल गए।

 

गांव के अपने हिस्से के सभी जमीन पर पौधरोपण करने का फैसला लिए हैं। अपने खेत में 100 सागवान, 100 महोगनी, 40 गम्हार के पौधे लगाए हैं। इस पौधे के कारण राज्य सरकार 13 फरवरी को कृषि वानिकी समागम में मुझे पटना बुलाकर सम्मानित की। कहते हैं सम्मान मिलने के बाद से मेरा हौसला बढ़ गया है। पारिवारिक विवाद से जमीन बाहर निकालने वाला है। जहां-जहां पौधा लगाने लायक है, वहां पौधा लगाने जा रहे हैं। टाल क्षेत्र की जमीन में पौधा सफल नहीं हो पाया। अन्य जमीन का घेराबंदी कराकर पौधरोपण कराएंगे।

 

रवाईच गांव में रवींद्र नाथ सिंह का घर अपनी तरफ आकर्षित करती है। घर के कैम्पस में आम का पेड़ मंजर से लदा है। आंवला, नींबू, केला सहित कई पेड़-पौधे लगे हैं। विभिन्न प्रकार के फुल भी लगे हैं। घर के आधे भाग में पेड़-पौधे लगाकर शुद्ध वातावरण बनाए रखने वाले रवींद्र बताते हैं कि कीमती लकड़ी और फलदार पौधे लगाए हैं। बेटा इसका जैसा उपभोग करे। पौधा पृथ्वी को संरक्षित करेगा तथा अगली पीढ़ी के लिए अर्थ का बड़ा साधन बन जाएगा। मेरा मन भी इसी में लगा रहता है।

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