Bihar

पहली बार शराब पीते पकड़े जाने पर 50 हजार जुर्माना या 3 साल की सजा

बिहार सरकार ने शराबबंदी कानून में संशोधन करते हुए इसके कड़े प्रावधानों में राहत दी गयी है. जबकि शराब की तस्करी और जहरीली शराब से होनेवाली मौत के मामलों में प्रावधानों को और कड़ा िकया गया है.

 

बुधवार को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी. विधानमंडल के मॉनसून सत्र में इसे पेश किया जायेगा. विधानमंडल से विधेयक पास होने के बाद संशोधित कानून लागू होगा. कैबिनेट की बैठक के बाद यह जानकारी कैबिनेट विभाग के प्रधान सचिव अरुण कुमार सिंह ने दी.

 

सूत्रों का कहना है कि वर्तमान कानून में आठ संशोधन किये गये हैं. नये प्रावधान के अनुसार पहली बार शराब पीने के मामले में पकड़े जाने पर 50 हजार रुपये का जुर्माना या तीन साल की कैद होगी. हालांकि यह अपराध अब जमानती होगा. एक से अधिक बार शराब पीते पकड़े जाने पर सजा की अवधि व जुर्माने की राशि बढ़ती जायेगी.

 

किसी भी गांव में शराब के उत्पादन या बिक्री होने के बाद लगाये जाने वाले सामूहिक जुर्माने के प्रावधान को शिथिल किया जायेगा. किसी भी व्यक्ति के घर में खाली या भरी शराब की बोतल मिलने पर उसके घर को सीज नहीं किया जायेगा. इसी तरह का प्रावधान वाहनों के मामले भी किया गया है.

 

अब तक शराब पीने या पिलाने के स्थल पर पाये गये 18 या इससे अधिक उम्र के सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई होती थी, इसमें भी ढील दी गयी है. संशोधन में शराब में हानिकारक पदार्थ मिलाने और इससे मौत होने पर सख्त प्रावधान के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गयी है. पूर्व में पकड़े गये शराब के मामले में 10 साल की सजा काट रहे ऐसे लोग, जो तीन साल की सजा पूरी कर चुके हैं, उन्हें भी राहत देने का प्रावधान किया गया है. शराब बरामद होने पर जमीन, घर और गाड़ी जब्त करने का प्रावधान खत्म कर दिया गया है.

 

पहले शराब मिलने पर गाड़ी, घर और जमीन जब्त कर ली जाती थी. हालांकि, शराब तस्करी के मामले में उपयोग किये जाने वाले वाहन या स्थल को सीज किया जायेगा. अब शराबबंदी कानून की आड़ में झूठे आरोप में किसी को फंसाना भी आसान नहीं होगा. कैबिनेट ने दहेज विरोधी कानून में भी संशोधन को मंजूरी दी है. उसे भी विधानमंडल के मॉनसून सत्र में पेश किया जायेगा.

 

नशामुक्ति केंद्र भेजे जायेंगे शराबी

 

जो व्यक्ति नशा करता पाया जायेगा, उसे डॉक्टरों की सलाह पर नशामुक्ति केंद्र भेजा जायेगा. किसी व्यक्ति को शराब या मादक द्रव्य पदार्थ रखकर फंसाने वाली सजा को खत्म किये जाने की भी चर्चा है. नये कानून में परिसर को भी परिभाषित किया गया है. पहले के कानून में भवन, दुकान, होटल, रेस्टोरेंट और बार शामिल थे. नये कानून में परिसर की परिभाषा में बूथ, नौका, छोटी नाव और वाहनों को भी शामिल किया गया है. शराब की सूचना रहने पर पुलिस को जानकारी नहीं देने पर पूर्व में सजा के प्रावधान थे, जिन्हें नये कानून में पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है.

 

दो साल में 62000 से अधिक केस दर्ज :

 

बिहार में पूर्ण शराबबंदी पांच अप्रैल, 2016 को लागू हुई थी. दो साल तीन माह में शराबबंदी कानून के उल्लंघन को लेकर 62 हजार से अधिक केस दर्ज हुए और 92 हजार से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हुई. पुलिस ने आठ लाख लीटर से अधिक शराब नष्ट किया है.

 

कैबिनेट के अन्य फैसले

 

रसोइयों की मौत पर मिलेगा चार लाख रुपये मुआवजा

 

कैबिनेट की बैठक में 33 एजेंडों पर मुहर लगी है. मिड डे मील बनाने वाले रसोइयों की मौत होने पर सरकार चार लाख रुपये सरकार मुआवजा देगी.

 

इसके अलावा ग्रामीण इलाके में बिजली आपूर्ति के लिए नौ नये ग्रिड बनाने की मंजूरी दी गयी है. सारण जिला के एकमा में ग्रिड सब स्टेशनों के विस्तारीकरण व अन्य कार्यों के लिए भी 2149.35 करोड़ रुपये की योजना को स्वीकृति मिली है. दूसरी ओर बिहार स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी के सभी ग्रिड उप केंद्रों के रियल टाइम डाटा संचार और दूरभाष को बिहार राज्य भार प्रेषण केंद्र से विश्वसनीय संचार माध्यम से जोड़ने के लिए 195.07 करोड़ रुपये की योजना को स्वीकृति दी गयी है.

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