पाकिस्तान मीडिया का झूठ एक बार फिर बेनकाब हुआ है। पाकिस्तानी मीडिया ने दावा किया था कि फलस्तीन ने आतंकी हाफिज सईद के साथ मंच साझा करने वाले राजदूत को वालिद अबु अली को फिर से पाकिस्तान में ही बहाल कर दिया है। हालांकि कुछ देर बाद ही फलस्तीन ने इन रिपोर्टों को खारिज कर दिया।

 

पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स ने दावा किया था कि फलस्तीन ने येरूशलम पर अमेरिकी फैसले का विरोध करने के लिए यह कदम उठाया है। पाकिस्तानी न्यूज चैनल जिओ टीवी ने भी इस खबर की पुष्टि करते हुए बताया था कि वालिद अबु अली बुधवार को अपना काम संभालने के लिए फिर से पाकिस्तान आ रहे हैं।

 

भारत में फलस्तीनी दूतावास ने राजूदत बहाली की खबर करी खारिज

 

हालांकि कुछ देर बाद ही भारत में फलस्तीन के दूतावास ने इन रिपोर्टों को खारिज कर दिया। नई दिल्ली में फलस्तीन के दूतावास की ओर से कहा गया, ‘हमें नहीं पता कि आपको फिलिस्तीनी राजदूत की फिर से पाकिस्तान में बहाली की सूचना कहां से मिली। जहां तक हमारी जानकारी है, वह अब भी फलस्तीन में हैं। हम इस रिपोर्ट को खारिज करते हैं। पाकिस्तान में हमारे राजदूत फलस्तीन में हैं। हमारी पोजिशन हमारे आधिकारिक बयान द्वारा जारी की गई थी जिसे पिछले हफ्ते जारी किया गया था।’

 

 

 

इससे पहले फलस्तीन ने अपने राजदूत के कृत्य पर गंभीर खेद जताते हुए कहा था कि भारत के साथ उसके मैत्रीपूर्ण रिश्ते बेहद अहम हैं। भारत ने इस मुद्दे पर अपना एतराज जताते हुए साफ कहा था कि फलस्तीन के राजदूत का आतंकियों के साथ मंच साझा करना बिल्कुल अस्वीकार्य है।

 

भारत ने जताया था कड़ा ऐतराज

 

भारत में तैनात नई दिल्ली में उसके राजदूत अदनान अबु अल हाइजा को विदेश मंत्रालय में तलब कर सख्त एतराज जताया था। साथ ही रामल्ला में फलस्तीनी विदेश मंत्री के साथ भारतीय प्रतिनिधि ने इस पर कड़ी नाराजगी जाहिर की थी। विदेश मंत्रालय ने इसके बाद एक बयान जारी कर भारत की गंभीरता का साफ संदेश दिया।

 

बयान में कहा गया कि भारत ने फलस्तीन को स्पष्ट कर दिया कि आतंकी के साथ राजदूत का मंच साझा करना हमें कतई स्वीकार नहीं है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक भारत के इस एतराज पर फलस्तीन ने अपने राजदूत के कृत्य पर गंभीर खेद जताया। साथ ही यह भी कहा कि वह राजदूत के खिलाफ उचित कार्रवाई कर रहा है। आखिरकार हाफिज के साथ मंच साझा करने के 24 घंटे के अंदर फलस्तीन ने राजदूत हटाने का फैसला कर लिया।

 

भारत ने इजरायल से मधुर संबंधों के बावजूद उसके खिलाफ दिया था वोट

 

अभी कुछ दिन पहले ही इजरायल के साथ मधुर संबंधों के बावजूद दशकों की पुरानी दोस्ती के चलते भारत ने संयुक्त राष्ट्र में फलस्तीन के समर्थन में वोट दिया था। यरुशलम को इजरायल की राजधानी के रूप में मान्यता देने के अमेरिका के फैसले के खिलाफ यह वोटिंग हुई थी।

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