बड़ैपुरा गांव में नया सवेरा: शराब का धंधा बंद हुआ, तो जीवन में लौटी ‘मिठास’


बेगूसराय/ छौड़ाही :बेगूसराय जिले के छौड़ाही प्रखंड का बड़ैपुरा गांव वर्षों से देशी शराब बनाने व बचने का केंद्र बन गया था. इसके लिए इलाके में एक कहावत प्रचलित हो गयी थी, ‘सूर्य अस्त और बड़ैपुरा मस्त’. लेकिन, आज शराबबंदी के बाद यहां ‘नयी सुबह’ दिखती है. इस गांव का माहौल अब पूरी तरह से बदल गया है और यहां के लोग शराब के धंधे को छोड़ कर नये कारोबार को अपनाकर खुशहाल जीवन जी रहे हैं.

बड़ैपुरा चौक पर शराब बेचने वाले युवक उपेंद्र सहनी ने अपनी आपबीती बतायी कि सुनते थे कि शराब से काफी आमदनी होती है. कुछ लोगों के कहने पर मैंने भी शराब बेचना शुरू किया. अच्छी-खासी आमदनी हुई. लेकिन, खुद पीने की लत लग गयी, तो बर्बादी भी जम कर हुई. सुबह-शाम यहां के लोग शराब में डूबे रहते थे. लेकिन, सरकार ने जैसे ही पूर्ण शराबबंदी लागू की, तो सब कुछ बदल गया. उपेंद्र सहनी कहते हैं, मैं खुद ही शराब पीता था. इसमें लाखों रुपये बर्बाद हो गया.

सेहत भी बिगड़ी. साथ ही घर-परिवार का माहौल भी बिगड़ गया. लेकिन, शराबबंदी के बाद मैं 10 माह से मिठाई की एक दुकान चलाता हूं, जिससे महीने के करीब 8000 रुपये की बचत हो जाया करती है. इस तरह मैंने डेढ़ लाख रुपये जमा किये और इनसे इन दिनों मैंने लकड़ी का कारोबार और मछलीपालन भी शुरू किया है. शराबबंदी के बाद खुद की सेहत तो सुधरी ही, अपने परिवार के साथ-साथ बड़ैपुरा गांव की तकदीर और तस्वीर भी बदल गयी. सहनी कहते हैं कि अब विश्वास ही नहींहो रहा कि यह वही गांव है, जहां सुबह-शाम शराब के नशे में लोग दिखते थे. आज चारों ओर शांति दिखायी देता है. सहनी बताते हैं कि मेरी एक बेटी भी है, जिसके नाम से मैं राज नंदनी स्वीट्स एवं नाश्ते की दुकान चलाता हूं. उन्होंने कहा कि बिहार के लिए यह बहुत बढ़िया काम हुआ है. अगर यह अनवरत जारी रहा, तो गांव, कसबे, टोले, मुहल्ले, समाज सबका विकास होगा.

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