बिहार के महामहिम राज्यपाल लालजी टंडन से केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने की मुलाकात

बिहार के महामहिम राज्यपाल लालजी टंडन से केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने की मुलाकात

14th September 2018 0 By Kumar Aditya

केन्द्रिय स्वास्थ्य राज्य मन्त्री भारत सरकार अश्विनी कुमार चौबे ने आज सन्ध्या 6 बजे बिहार के महामहिम राज्यपाल श्री लालजी टंडन से मुलाकत कर उन्हे पुष्प गुच्छ, मन्जूषा कला युक्त रेशमी अंग वस्त्र और शौल देकर उनका अभिनन्दन किया।

 

मन्त्री श्री चौबे ने महामहिम जी का अभिनंदन करते हुए कहा की बिहार संस्कृति एवं पौराणिक महत्व की धरती है जहाँ प्राचीन जिवन सभ्यता के साथ शिक्षा का धरोहर नालन्दा और विक्रमशिला विश्वविद्यालय भी है। यहीं बोध गया में भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ और महावीर, गुरु गोविन्द सिंह जी की जन्म भूमि है। श्री चौबे ने कहा की बिहार की जनता सांस्कृतिक समरसता और सद्भाव में भरोसा करती है और इसी दिशा में आप जैसे व्यक्तित्व के आगमन से बिहार को एक नयी दिशा मिलेगी। उन्होने डुमराव के लाल भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान के विषय में भी महत्वपूर्ण जानकारी दिया और कला को लोगों से जोडने के लिये डुमराव स्टेशन पर शहनाई वादन की बात कही। साथ ही विश्वामित्र की धरती बक्सर एवं अंगराज कर्ण की धरती रेशमी नगर भागलपुर की सांस्कृतिक पौराणिक महत्व की जानकारी भी प्रदान किया। साथ ही भोजपुर के बाबु कुंवर सिंह की वीर गाथा की भी चर्चा किया। विशेष रुप से श्री चौबे ने सुप्रसिद्ध पंच कोषी मेला और रामायण परिपथ के विषय में महत्वपूर्ण जानकारी महामहिम जी के सम्मुख रखा। साथ ही उन्होंने आग्रह किया की कला एवं संस्कृति से जुड़े हुए विभिन्न घराना एवं मिथिला के ध्रुपद गायन को भी उत्कृष्ट तक पहुँचाने पर भी चर्चा की। बिहुला बाला विषहरी पूजा एवं मंजूषा कला के विषय में भी जानकारी श्री चौबे ने महामहिम को प्रदान किया। मंत्री श्री चौबे ने बिहार में शिक्षा के क्षेत्र में हो रही गिरावट पर भी विशेष ध्यान देने का आग्रह किया जिस की गंभीरता को महामहिम राज्यपाल जी ने समझते हुए कारगर कदम उठाने की बात कही।

 

श्री चौबे ने महामहिम राज्यपाल महोदय को विक्रमशिला विश्वविद्यालय के सेंट्रल यूनिवर्सिटी बनाए जाने के बाद भी जमीन उपलब्ध नहीं होने की बात कहीं और एक कैंप ऑफिस खोले जाने के संदर्भ में अपनी बात कही ताकि जल्द से जल्द आगे के कार्यों को बढ़ाया जा सके। मंत्री श्री चौबे ने महामहिम को बक्सर सहित विक्रमशिला विश्वविद्यालय आने का न्योता दिया जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार भी किया।

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