नवादा जिले के सब्जी ग्राम के नाम से मशहूर नीम-नवादा गांव के किसान बीते कई सालों से परंपरागत फसल धान और गेंहू की खेती को कम मुनाफा के चलते छोड़ दिया है. अब इस गांव के किसान ब्रोकली, ग्रीन गोभी, रेड बंधा गोभी, काली मूली उगाकर मिसाल पेश कर रहे हैं.

फिर दो साल से नीम-नवादा गांव के किसान विदेशी सब्जी ब्रोकली की खेती कर रहे हैं, इसकी डिमांड बड़े शहरों के रेस्टोरेंट और सितारा होटलों में होती है. जमुई के सब्जी ग्राम के ये किसान ब्रोकली के अलावा चाइनीज फूल गोभी, लाल बंधा गोभी, लाल और काली मूली की भी पैदावार कर रहे हैं.

हालांकि खुद पहल कर आमदनी बढ़ाने वाले किसानों को मार्केट की व्यवस्था नहीं होने के कारण विदेशी सब्जियां को सस्ते दरों पर बेचने के लिए मजबूर हैं. सदर प्रखंड के नीम-नवादा गांव के किसानों को मलाल है कि सब्जी ग्राम के नाम से मशहूर इस गांव के किसानों को उनकी फसल के बदले उचित कीमत नहीं मिल पाती है. इसका कारण जमुई में बाजार और मंडी का न होना है.

सरकार दावा करती है कि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य के अनुसार उनके फसलों को कीमत मिलेगी लेकिन इस सब्जी ग्राम के किसानों को कोई फायदा नहीं मिलता. किसान प्रियरंजन उर्फ राम प्रवेश की माने तो यहां के किसान 3 सौ एकड़ में सब्जी उगाते है लेकिन मार्केट नहीं होने के कारण व्यापारी औने-पौने दाम में सब्जी बेचने को मजूबर हैं.

हाल के दो वर्षों से यहां के किसान 6 तरह की विदेशी सब्जियों की खेती कर रहे हैं. इस गांव की सब्जी कई जिलों मे बिक्री के लिए भेजी जाती है लेकिन इस सब्जी ग्राम के किसानों को मलाल है कि जिले में इनकी फसलों के लिए बाजार नहीं मिल रहा है, खासकर ब्रोकली जैसी विदेशी सब्जी को.

इस गांव में किसानों के घर की महिलाएं भी मानती है कि सब्जी की उचित कीमत नहीं मिलने से परिवार को परेशानी उठानी पड़ती है. सब्जी उगाकर आमदनी को बढ़ाने की सोच रखने वाली ममता देवी और रेखा देवी का कहना है कि सरकार और जिला प्रशासन मदद करे तो ये लोग सब्जी उत्पादन में बिहार का नाम रोशन कर सकते हैं.

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