12 वर्षों बाद राज्य में 4 हजार दारोगा (पुलिस सब इंस्पेक्टर) की बहाली होगी। 20 हजार सिपाही भी नियुक्त किए जाएंगे। इसके लिए गृह विभाग ने सभी जिलों से रोस्टर क्लियरेंस मांगा है। यह रिपोर्ट आने के बाद बहाली को लेकर विज्ञापन सहित अन्य प्रक्रिया शुरू होगी। इसके पहले वर्ष 2004 में दारोगा की वेकेंसी (1510 पद) का विज्ञापन निकला था आैर बहाली की प्रक्रिया 2009 में पूरी हुई थी। महिलाओं को 35% आरक्षण…

– बता दें कि बिहार में लंबे समय से पुलिस बल की कमी चल रही है जिसे दूर करने की ये कवायद है।

– इसके तहत 2017-18 तक कुल 43 हजार 131 पदों पर बहाली होनी है। इस कड़ी में बीते वर्षों के दौरान खासकर सिपाहियों की बहाली होते रही है। 
 

महिलाओं को 35% आरक्षण
 

– बहाली में महिलाओं को 35 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। सरकार ने पहले ही महिलाओं के लिए आरक्षण की घोषणा कर रखी है।

– इस पूरी बहाली को तुरंत पूरा करने की तैयारी है। एक बड़े अधिकारी के मुताबिक इस बार ऐसा नहीं होगा जैसा 2004 में दारोगा की बहाली में हुअा था।

 

नए तरीके से होगी सिपाही की भर्ती, लिखित परीक्षा केवल क्वालिफाइंग, शारीरिक परीक्षा के अंक पर ही चयन

 

– सिपाही भर्ती का तरीका बिल्कुल बदल गया है। अब लिखित परीक्षा केवल फिजिकल के लिए क्वालिफाइंग होगी।

– शारीरिक परीक्षा में मिले अंकों के आधार पर ही मेरिट लिस्ट बनेगी या बहाली होगी।

– इसके विभिन्न पहलू यानी दौड़, गोला फेंक, ऊंची कूद के अंक तय  कर दिए गए हैं। इन्हीं अंकों के बूते मेरिट लिस्ट बनेगी।

– नई व्यवस्था में  सभी वर्ग को बहाली के लिए उम्र में 2-2 वर्ष की छूट दी गई है।

– लिखित परीक्षा में गोलमाल नहीं हो, इसलिए लिखित परीक्षा की उत्तर पुस्तिका की  कार्बन कॉपी चयन पर्षद के पास भी रहेगी।

 

दारोगा भर्ती पुराने पैटर्न पर, पहले फिजिकल, फिर लिखित परीक्षा

 

दारोगा बहाली की प्रक्रिया में सबसे पहले फिजिकल टेस्ट होगा। शारीरिक परीक्षा में सफल होने पर लिखित परीक्षा देनी होगी। पिछली बार भी इसी पैटर्न पर बहाली हुई थी। 

 

बिहार में जवानों की भारी कमी, एक लाख लोगों पर सिर्फ 70

 

– राष्ट्रीय आैसत के मुकाबले बिहार में पब्लिक व पुलिस का अनुपात काफी कम है। राष्ट्रीय आैसत है-1 लाख आबादी पर 143 पुलिसकर्मी।

– लेकिन बिहार में 1 लाख लोगों की सुरक्षा के लिए महज 70 पुलिसकर्मी ही हैं।

– 20 हजार सिपाही व 4 हजार दारोगा की बहाली के बाद प्रति एक लाख की आबादी पर पुलिसकर्मियों की संख्या 150 तक हो जाएगी। 

 

थानों में 30 फीसदी अफसरों के पद खाली 

 

– बिहार पुलिस एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार सिंह के मुताबिक थानों के स्तर पर 30 फीसदी अफसरों (जमादार से इंस्पेक्टर तक) की कमी है।

– इसके कारण अफसरों पर काम का दबाव रहता है। नतीजतन कार्यक्षमता पर भी बुरा असर पड़ता है।

– सिपाहियों की कमी के कारण ही 32 हजार होमगार्ड विधि-व्यवस्था व अन्य सुरक्षा के काम में लगाए जाते हैं।

– ऐसे हालात को देखते हुए बहाली की प्रक्रिया को जल्दी पूरा करने की आवश्यकता है।

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