सृजन महिला विकास सहयोग समिति, सबौर की संस्थापक मनोरमा देवी नहीं रही। मंगलवार की सुबह तीन बजे के करीब उन्होंने न्यू विक्रमशिला कालोनी स्थित अपने घर में आखिरी सांस ली। वे 72 साल की थीं। अपने पीछे दो बेटे और तीन बेटी समेत भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं। गरीब महिलाओं में मनोरमा दीदी के नाम से वह लोकप्रिय थीं।उनके बेटे अमित कुमार के अनुसार वे पिछले दो-तीन दिनों से बीमार चल रही थी। उनके निधन की खबर सुनकर सुबह से उनके घर पर भीड़ उमड़ पड़ी। जिलाधिकारी आदेश तितरमारे, एसडीओ कुमार अनुज भी पहुंचे और उन्हें श्रद्धांजली दी। उनका अंतिम संस्कार देर रात बरारी घाट पर किया गया। उनकी शव यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। उनके बड़े बेटे डॉ. प्रणव कुमार आस्ट्रेलिया में डॉक्टर हैं। महिला सशक्तिकरण के लिए उन्हें मंगलवार को टाउन हाल में इफको के सम्मेलन में डीएम की ओर से सम्मानित किया जाना था। मनोरमा देवी ने अपनी संस्था के माध्यम से बड़ी संख्या में महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा। सबौर कृषि कॉलेज में अपने वैज्ञानिक पति डॉ. अवधेष कुमार की असामयिक मौत के बाद मनारेमा ने ठेला पर कपड़ा बेचकर अपने परिवार का भरण पोषण किया था। उन्होंने 1990 में सबौर में महिला सृजन नामक संस्था बनाकर दो सिलाई मशीन से काम शुरू किया। आज संस्था में पांच हजार महिलाएं जुड़ी हैं। सबौर के आसपास के गांवों की ये सभी महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी हैं। उन्हें राज्य व केंद्र सरकार के कई सम्मान भी मिले हैं।

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