भागलपुर:ट्रेन का इंतजार, अव्यवस्था की मार, यात्री बेजार

भागलपुर:ट्रेन का इंतजार, अव्यवस्था की मार, यात्री बेजार

10th July 2018 0 By Kumar Aditya

कभी आपको मंदारहिल रेलखंड पर हंसडीहा पैसेंजर से सफर करने का मौका मिले, तो समझिए वह दिन आपको हमेशा यादगार रहेगा. सोमवार को भी यह ट्रेन 20 मिनट की देरी से खुली. किस्मत अच्छी थी कि सीट मिल गयी. जब यह ट्रेन गोनूधान पहुंची तो अचानक जैसे लोगों की बाढ़ ट्रेन में आ गयी. सीट को लेकर लूटपाट जैसी मच गयी. एक सीट पर 12 से 15 यात्री बैठ गये. खड़े रहने वाले यात्रियों की गिनती नहीं की जा सकी.

 

शौचालय नहीं, महिला यात्री उतरी गंतव्य से पहले ही. छह डिब्बे की इस ट्रेन में दो डिब्बे ऐसे थे, जिसमें शौचालय नहीं था. महिला यात्रियों को काफी परेशानी हुई. सावंती देवी इस अव्यवस्था को बर्दाश्त नहीं कर सकी और धौनी के बदले परिवार के साथ टेकानी स्टेशन में ही उतर गयी. इधर, बाकी के चार डिब्बे में शौचालय तो था मगर, उसमें पानी की व्यवस्था नहीं थी. वहीं शौचालय में नंगे तार से करंट लगने का खतरा के चलते कोई नहीं जा रहा था.

 

टूटी थी खिड़की और पंखा भी था बेकार. इस ट्रेन की ज्यादातर खिड़कियां टूटी थी. इसके पंखे भी बेकार थे. खचाखच भीड़ के चलते रेल यात्री पसीने से लथपथ थे और रेलवे प्रशासन को कोस रहे थे.

 

रेल पुलिस नजर नहीं आयी. भागलपुर से कमराडोल स्टेशन तक लगभग तीन घंटे की सफर में कहीं भी किसी भी बोगी में रेल पुलिस नजर नहीं आयी. रोजाना चलने वाले यात्रियों से पूछने पर बताया कि दिन में पुलिस नहीं चलती है. रात की ट्रेन में ही पुलिस नजर आती है.

 

गंदगी के बीच करना पड़ा रेल सफर. ट्रेन में पहले तो सभी डिब्बे में शौचालय नहीं है, जिस डिब्बे में शौचालय है तो उसमें पानी की व्यवस्था नहीं है. कई डिब्बे बेहद गंदे थे. इस कारण ट्रेन का हर डिब्बा बदबू कर रहा था.

 

70 फीसदी यात्री चल रहे थे बेटिकट. इस ट्रेन में 70 फीसदी यात्री बेटिकट सफर कर रहे थे. दरअसल, कुछ व्यवस्था का दोष था तो कुछ रेलयात्रियों की. जहां स्टेशन पर टिकट खिड़की खुली थी तो यात्री टिकट नहीं कटा रहे थे, जहां कोई टिकट कटाने जा रहा था तो वहां की टिकट खिड़की बंद मिल रही थी. पुरैनी हॉल पर उतर का जायजा लिया तो वहां मो इकबाल ने बताया कि सुबह से काउंटर खोलकर बैठे हैं मगर, दोपहर तक में केवल सात टिकट की बिक्री हुई है.

 

स्टॉपेज नहीं, फिर भी मकससपुर में आते-जाते रुकी ट्रेन. ट्रेन चालक में लोगों का खाैफ दिखा. यही वजह है कि कोइलीखुटाहा और गोनूबाबा धाम हॉल्ट के बीच मकससपुर में जाते-आते ट्रेन रुकी. ट्रेन में यात्रियों से पूछने पर बताया कि अगर ट्रेन नहीं रुकती है तो स्थानीय लोग चालक और गार्ड के साथ मारपीट करता है.

 

चालक और गार्ड को यात्रियों का रखना पड़ता पूरा ख्याल. ट्रेन में कौन चढ़ नहीं सका या उतर नहीं सके, इसका चालक और गार्ड को पूरा ख्याल रखना पड़ता है. पूरे रास्ते गार्ड को वॉकी-टॉकी पर चालक को बताते रहा कि कब चलना और कब रुकना है. जब कोई चढ़ नहीं पा रहे थे, तो गार्ड ट्रेन को रुकवा दे रहे थे. फिर गार्ड बताते थे कि अब चलना है.

 

सालों से नहीं बदले सड़े हुए डिब्बे. छह डिब्बों की हंसडीहा पैसेंजर ट्रेन है और इसके लगभग सभी डिब्बे सड़ चुके हैं. सड़े हुए डिब्बे सालों से नहीं बदले जा सके हैं. इसके सीट उखड़े हैं. रंग बदरंग सा हो गया है. खिड़कियां टूटी पड़ी है. डिब्बे में जगह-जगह नंगे तार जानलेवा बना है.

 

विलंब से चलने की वजह हर चार किमी पर स्टॉपेज

इस ट्रेन के विलंब से चलने का कारण हर चार किमी पर स्टॉपेज है. इसके अलावा कुछ अवैध स्टॉपेज है, जिससे ट्रेन अक्सर विलंब हो जाया करती है. दूसरा कारण सिंगल लाइन भी है. क्राॅसिंग के कारण भी ट्रेन लेट होती है. दरअसल, भागलपुर से हंसडीहा रेलमार्ग की दूरी 73 किमी है. इस बीच 19 स्टेशन व हॉल्ट है. परिचालन के लिए तीन घंटे का समय निर्धारित है मगर, यह ट्रेन शायद ही कभी निर्धारित समय पर किसी भी स्टेशन या गंतव्य तक पहुंची होगी.

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