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भागलपुर : फर्जी डिग्री मामले में तोमर और विवि के आठ कर्मियों की कोर्ट में पेशी

 

भागलपुर : दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर की लॉ की फर्जी डिग्री मामले में दिल्ली के एसीएमएम पटियाला हाउस कोर्ट में बुधवार से ट्रॉयल शुरू हो गया. केस के अनुसंधानकर्ता सत्येंद्र सांगवान ने बताया कि मुख्य गवाह के रूप में विवि के आशुतोष प्रसाद की कोर्ट में गुरुवार को पेशी हुई. अगली तिथि के लिए आशुतोष प्रसाद की गवाही अस्थगित की गयी. शुक्रवार को भी सुनवाई होनी है. मामले में आरोपित तोमर और टीएमबीयू के सात कर्मचारी की भी कोर्ट में पेशी हुई है.

 

आरोपित में बड़े नारायण सिंह, डॉ रजी अहमद, राजेंद्र प्रसाद सिंह, निरंजन शर्मा, जर्नादन प्रसाद, दिनेश कुमार श्रीवास्तव, अनिल कुमार सिंह शामिल हैं. जबकि आरोपित सदानंद राय का उपचार हॉस्पिटल में चलने के कारण कोर्ट में पेशी नहीं हो पायी. आशुतोष प्रसाद की ओर से अधिवक्ता अमरेंद्र कुमार चौबे व नरेंद्र कुमार चौबे कोर्ट में उपस्थित हुए.

 

केस के अनुसंधानकर्ता ने बताया दिल्ली हाइकोर्ट ने तोमर की उस याचिका को रद्द कर दी है, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके ऊपर लगे आरोप गलत हैं. सुनवाई के दौरान गवाहों की पेशी शुरू हो गयी है. मामले से जुड़े दस्तावेज भी कोर्ट में प्रस्तुत किये जा रहे हैं.

 

उक्त लोगों पर आइपीसी की धारा 420/120-बी/471 के तहत धोखाधड़ी, साजिश, फर्जी कागजात को असली कागजात बना कर उपयोग किये जाने का मामला पुलिस ने दर्ज किया है. लॉ की डिग्री को टीएमबीयू द्वारा फर्जी घोषित किये जाने को तोमर ने हाइकोर्ट पटना में चुनौती दी है. तोमर ने कहा कि उनकी डिग्री सही है.

 

विवि ने डिग्री फर्जी घोषित करने से पूर्व उनका पक्ष नहीं लिया. फिलहाल मामला कोर्ट में है. अनुसंधानकर्ता ने बताया कि 21 जुलाई 2018 को कोर्ट ने उक्त लोगों को दोषी करार दिया है. टीएमबीयू से लॉ की फर्जी डिग्री लेने का आरोप तोमर पर लगा है.

 

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