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भागलपुर:-JLNMCH में अब दमा के मरीजों का इलाज संभव

भागलपुर:- दमा बीमारी से पीडि़त मरीजों को राहत भरी खबर। इस बीमारी से पीडि़त मरीजों को इलाज के लिए प्राइवेट क्लीनिक पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। क्योंकि, अब जवाहर लाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल में दमा पीडि़त का इलाज संभव होगा। इसके लिए अस्पताल प्रशासन ने हरी झंडी दे दी है। सप्ताह में दो दिन मंगलवार और शुक्रवार को इसके लिए विशेष क्लीनिक चलेगा।

दरअसल, शहर और ग्रामीण इलाकों में बढ़ रहे प्रदूषण के चलते अस्थमा यानि कि दमा का रोग तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे वातावरण में लोगों के लिए सांस लेना तक दूभर हो गया है। अस्थमा के मरीजों के लिए बढ़ती ठंड और प्रदूषण दोनों ही नुकसानदायक होते हैं। ना सिर्फ वृद्ध बल्कि छोटे छोटे बच्चे भी अस्थमा की चपेट में आ रहे हैं। ऐसे में इससे पीडि़त मरीजों को इलाज के लिए प्राइवेट अस्पताल में जाना पड़ता है। इलाज महंगी होने के कारण कई लोग इलाज नहीं करा पाते हैं। इसलिए अस्पताल प्रशासन ने इलाज के लिए व्यवस्था की है।

टीवी और चेस्ट विभाग के एचओडी डॉ. डीपी सिंह ने बताया कि दमा की बीमारी में इनहेलर थेरेपी बहुत ही कारगर है पर इसकी महंगी दवा रहती है। इस वजह से गरीबों तक यह दवा नहीं पहुंच पाती है, इसका स्पेशल तौर पर इलाज भी नहीं होता था। इसलिए फेफड़े की जांच कंप्यूटराइज्ड तरीके से हो, इसकी व्यवस्था करने का प्लान हमलोग कर रहे हैं। इनका कहना है कि इस इलाके में सांस की बीमारी के मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है।

आउटडोर में हर दिन सौ मरीजों की होती है जांच

ओपीडी में एक सौ मरीजों की रोज जांच होती है, लेकिन अब दो से तीन सौ मरीजों का चेकअप सिर्फ इस विभाग में करना चाहते हैं। इससे यह पता चलेगा कि मरीजों की संख्या कितनी है और उनकी बीमारी का स्तर कितना अधिक बढ़ा है। इसके लिए सॉलविटामोल व डेरीफाइलिन टेबलेट कॉमन है, लेकिन प्रॉपर टेस्ट से दवा में भी बदलाव संभव है। इनहेलर थेरेपी से सीधे फेफड़े के अंदर सांस की नली में दवा जाता है और मरीजों को राहत मिलती है।

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