भारतीयों के लिए आई गर्व महसूस करने वाली रिपोर्ट, 2030 तक पिछड़ जाएगा अमेरिका

भारतीयों के लिए आई गर्व महसूस करने वाली रिपोर्ट, 2030 तक पिछड़ जाएगा अमेरिका

22nd July 2018 0 By Bibhav Kumar

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी लगातार अपने भाषणों में दावे करते रहे हैं कि 2030 तक भारत बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगी.

डीबीएस की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इन एशियाई अर्थव्यवस्थाओं का जीडीपी तेज वृद्धि के साथ 2030 तक 28,000 अरब डॉलर हो जाएगी.
नई दिल्ली: भारत सहित एशिया की 10 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं का सम्मिलित वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 10-12 साल में अमेरिका से अधिक हो जाएगा. डीबीएस की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इन एशियाई अर्थव्यवस्थाओं का जीडीपी तेज वृद्धि के साथ 2030 तक 28,000 अरब डॉलर हो जाएगी, जो अमेरिका से अधिक होगी. डीबीएस के अनुसार इन दस अर्थव्यवस्थाओं में चीन , हांगकांग , भारत , इंडोनेशिया , मलेशिया , फिलिपीन , सिंगापुर , दक्षिण कोरिया , ताइवान और थाइलैंड शामिल हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि ये दस अर्थव्यवस्थाएं 2030 तक तेजी से बढ़ेंगी और इनका सम्मिलित वास्तविक जीडीपी (2010 के डॉलर मूल्य) पर 28,350 अरब डॉलर के बराबर होगा. वहीं इस दौरान अमेरिका का सकल घरेलू उत्पाद बढ़ कर 22,330 अरब डॉलर रहेगा. डीबीएस ने कहा कि हमें उम्मीद है कि 2030 तक एशिया की दस प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं अमेरिका को पीछे छोड़ देंगी.

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दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना भारत
इससे पहले इसी महीने आई वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत अब दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है. उसने इस मामले में फ्रांस को पीछे छोड़कर यह मुकाम हासिल किया है. वर्ल्ड बैंक के मुताबिक, भारत की GDP (सकल घरेलू उत्पाद) पिछले साल के आखिर में 2.597 ट्रिलियन डॉलर (178 लाख करोड़ रुपए) रही, जबकि फ्रांस की 2.582 ट्रिलियन डॉलर (177 लाख करोड़ रुपए) रही. कई तिमाहियों की मंदी के बाद भारत की अर्थव्यवस्था जुलाई 2017 से फिर से मजबूत होने लगी.

आपको बता दें कि भारत की आबादी इस समय 1.34 अरब यानी 134 करोड़ है और यह दुनिया का सबसे आबादी वाला मुल्क बनने की दिशा में अग्रसर है. उधर, फ्रांस की आबादी 6.7 करोड़ है. वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, फ्रांस की प्रति व्यक्ति जीडीपी भारत से 20 गुना ज्यादा है.

वर्ल्ड बैंक ग्लोबल इकोनॉमिक्स प्रॉस्पेक्टस रिपोर्ट के मुताबिक, नोटबंदी और जीएसटी के बाद आई मंदी से भारत की अर्थव्यवस्था उबर रही है. नोटबंदी और जीएसटी (माल एवं सेवा कर) के कारण दिखे ठहराव के बाद पिछले साल मैन्युफैक्चरिंग और उपभोक्ता खर्च भारतीय अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के प्रमुख कारक रहे. एक दशक में भारत ने अपनी जीडीपी को दोगुना कर दिया है और संभावना जताई जा रही है कि चीन की रफ्तार धीमी पड़ सकती है और एशिया में भारत प्रमुख आर्थिक ताकत के तौर पर उभर सकता है. उम्मीद जताई गई है कि भारत 2032 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है.

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