मोक्षधाम और घाटों के सौंदर्यीकरण पर रोक

मोक्षधाम और घाटों के सौंदर्यीकरण पर रोक

12th June 2018 0 By Kumar Aditya

केंद्र सरकार ने नमामि गंगे परियोजना रद करते हुए राशि आवंटन पर लगाई रोक कैचवर्ड :-विकास पर ग्रहण – बरारी में शवदाह के लिए मोक्षधाम का होना था निर्माण – सुल्तानगंज, कहलगांव और बरारी घाट के सौंदर्यीकरण की थी योजना – घाटों पर सीढि़यों के निर्माण व अन्य कार्य पर खर्च होने थे 46 करोड़ – एनबीसीसी ने सितंबर 2016 में तैयार कर ली थी डीपीआर – बनारस की तर्ज पर शवदाह स्थल को किया जाना था विकसित

भागलपुर। जिले में नमामि गंगे परियोजना के तहत बरारी, सुल्तानगंज और कहलगांव में गंगा घाटों का सौंदर्यीकरण और बरारी श्मशान घाट पर मोक्षधाम निर्माण की योजना पर ग्रहण लग गया। केंद्र सरकार ने अपनी इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए राशि के आवंटन पर रोक लगा दी है। हालांकि पड़ोसी जिला मुंगेर में राशि आवंटन पर किसी प्रकार की रोक नहीं है। वहां घाट और मोक्षधाम का निर्माण नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कंपनी इंडिया लिमिटेड (एनबीसीसी) के माध्यम से कराया जा रहा है।

मुंगेर के साथ भागलपुर के लिए भी एनबीसीसी ने ही प्राक्कलन तैयार किया था। लेकिन मंत्रालय में फेरबदल होते ही योजना को रद कर दिया गया। नमामि गंगे परियोजना के तहत भागलपुर के लिए भी योजना बनाई गई थी। बरारी में मोक्षधाम (शवदाह गृह) और गंगा घाटों के निर्माण पर 46 करोड़ रुपये का प्राक्कलन तैयार किया गया था। इसमें सुल्तानगंज और कहलगांव में घाट का निर्माण एवं सौंदर्यीकरण की योजना भी शामिल थी।

टेंडर की प्रकिया हो गई थी पूरी, संवेदक का भी हो गया था चयन

एनबीसीसी ने सितंबर 2016 में डीपीआर की टेंडर प्रकिया भी पूरी कर ली थी। जनवरी 2017 में संवेदक का भी कर चयन कर लिया गया था। जिसके बाद संवेदक ने कार्य स्थल का मुआयना कर निर्माण की दिशा में पहल भी शुरू कर दी थी।

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क्या-क्या होना था कार्य

गंगा के घाटों को विकसित किया जाना था। पहले चरण में बरारी गोढ़ी टोला घाट और काली घाट पर सीढ़ी और सौंदर्यीकरण का कार्य किया जाना था। साथ ही उक्त राशि से बरारी श्मशान घाट का कायाकल्प भी किया जाना था। बरारी श्मशान घाट में बनारस की तर्ज पर मोक्षधाम का निर्माण किया जाना था। शवदाह करने के लिए 10 लोहे के चैनल के स्टैंड लगाए जाने थे। चैनल के ऊपरी हिस्से में चिमनी की सुविधा और स्टैंड के नीचे ट्रे लगाने की योजना थी, ताकि अवशेषों का बिखराव रोका जा सके। इस मॉडल से लकड़ी की खपत आधी से कम हो जाती। श्मशान घाट का पक्कीकरण व सीढ़ी के निर्माण की भी योजना बनाई गई थी। सौंदर्यीकरण के लिए सेंड स्टोन, शेड एवं श्मशान घाट पहुंचने वाले मार्ग का निर्माण।

पार्किंग और शौचालय बनाने की थी योजना

परिसर में भगवान शिव के मंदिर, पार्किंग, शौचालय एवं विकलांगों के लिए घाट तक पहुंचने की व्यवस्था आदि कार्य योजना में शामिल थे। पर्यावरण के लिए पेड़-पौधे व गार्डेन को विकसित करने की योजना बनाई गई थी। बरारी के गोढ़ीटोला घाट और काली घाट का सौंदर्यीकरण करना था। घाट पर पायलिंग कर सीढ़ी घाट का निर्माण, घाट के दोनों ओर 200 से 300 मीटर स्टोन पीसीसी और टाइल्स, चेंज रूम, शौचालय, पार्किंग के साथ घाट तक पहुंचने के लिए पीसीसी पथ और रोशनी के लिए हाईमास्ट लाइट की सुविधा की योजना थी।

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कोट एक वर्ष तक परियोजना की राशि आवंटन के इंतजार के बाद जानकारी दी गई कि भागलपुर की योजना के लिए आवंटन नहीं मिलेगा और इसे रद कर दिया गया है।

सुमनकांत, उप परियोजना प्रबंधक, एनबीसीसी

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