मोदी सरकार की सफाई, नहीं मांगे आरबीआई के रिजर्व से 3.6 लाख करोड़

मोदी सरकार की सफाई, नहीं मांगे आरबीआई के रिजर्व से 3.6 लाख करोड़

9th November 2018 0 By Kumar Ashwini

रिजर्व बैंक और मोदी सरकार के बीच जारी खींचतान के बीच केन्द्र सरकार ने सफाई दी है कि उसकी नजर आरबीआई के रिजर्व खजाने पर नहीं है. केन्द्र सरकार की तरफ से डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स सचिव एस सी गर्ग ने कहा कि केन्द्र सरकार ने रिजर्व बैंक से 3.6 लाख करोड़ रुपये लेने की पेशकश नहीं की है.

गर्ग ने दावा किया कि केन्द्र सरकार ने रिजर्व बैंक के इकोनॉमिक कैपिटल फ्रेमवर्क को दुरुस्त करने के तरीकों को इजात करने की पहल की है. इसके साथ ही केन्द्र सरकार की वित्तीय स्थिति को मजबूत करार देते हुए गर्ग ने कहा कि मीडिया में आरबीआई के रिजर्व खजाने पर सरकार की नजर को लेकर दुष्प्रचार किया जा रहा है. गर्ग ने दावा किया कि चालू वित्त वर्ष के अंत में (मार्च 2019) में केन्द्र सरकार अपना वित्तीय घाटा 3.3 फीसदी पर सीमित रखने में सफल होगी.     

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक केन्द्र सरकार 19 नवंबर को होने आरबीआई बोर्ड बैठक में अपना अहम एजेंडा सामने करते हुए बोर्ड में रिजर्व बैंक गवर्नर की भूमिका को कम करने का काम कर सकती है. दरअसल, खबर के मुताबिक केन्द्र सरकार और रिजर्व बैंक गवर्नर के बीच विवाद की अहम वजह केन्द्रीय रिजर्व बैंक के पास मौजूद 9.6 ट्रिलियन (9.6 लाख करोड़) रुपये की रकम है.

एक प्रमुख अखबार ने सूत्रों के हवाले से दावा किया था कि केन्द्र सरकार रिजर्व बैंक के पास पड़ी इस रिजर्व मुद्रा का लगभग एक-तिहाई हिस्सा लेना चाहती है. केन्द्र सरकार का रुख है कि इतनी बड़ी मात्रा में रिजर्व मुद्रा रखना रिजर्व बैंक की पुरानी और संकुचित धारणा है और इसे बदलने की जरूरत है. खबर के मुताबिक केन्द्र सरकार रिजर्व बैंक से चाहती है कि उसे इस रिजर्व मुद्रा से 3.6 ट्रिलियन रुपये दिए जाएं. केन्द्र सरकार इस मुद्रा का संचार कर्ज और अन्य विकास कार्यों पर खर्च के जरिए अर्थव्यवस्था को मजबूत करना चाहती है.

गौरतलब है कि इंडिया टुडे कि रिपोर्ट के मुताबिक 19 नवंबर को होने वाली आरबीआई बोर्ड की प्रमुख बैठक में केन्द्र सरकार अपने नुमाइंदों के जरिए विवादित विषयों पर प्रस्ताव के सहारे फैसला करने का दबाव बना सकती है. दरअसल, रिजर्व बैंक बोर्ड में केन्द्र सरकार के प्रतिनिधियों की संख्या अधिक है लिहाजा फैसला प्रस्ताव के आधार पर लिया जाएगा तो रिजर्व बैंक गवर्नर के सामने केन्द्र सरकार का सभी फैसला मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा.

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