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श्रावणी मेला: सुल्तानगंज के घाट खतरनाक, शिवभक्तों को झेलनी होगी परेशानी!

श्रावणी मेला का उद्घाटन समारोह 27 जुलाई को है। सुल्तानगंज मेला परिसर और कांवरिया पथ बोल बम के नारों से गूंज रहा है। बांग्ला सावन के बाद रोज 25 से 30 हजार कांवरिया सुल्तानगंज आ रहे हैं। गंगा किनारे के खतरनाक घाट कांवरियों की परीक्षा ले रहा है। महत्वपूर्ण घाटों पर तेजी से कटाव होने के चलते परेशानी बढ़ गयी है।
मेला शुरू होने में मात्र पांच दिन बचा है। लेकिन मेला क्षेत्र और कांवरिया पथ में सुविधाएं नहीं दिख रही है। कांवरिया मुख्य रूप से जहाज घाट और सीढ़ी घाट पर स्थान कर जल भरते हैं। लेकिन दोनों घाटों की स्थिति खतरनाक बनी हुई है। जहाज घाट के दोनों तरफ कटाव हो रहा है। कुछ जगहों पर कांवरियों को स्नान करने के लिए मिट्टी का बैग रखा हुआ है। लेकिन कटाव के चलते परेशानी बढ़ गयी है।
यही हाल नयी सीढ़ी घाट का भी है। अजगैबीनाथ मंदिर के सामने का घाट खतरनाक हो चुका है। गंगा में बैरिकेडिंग की गयी है,लेकिन उतरने का रास्ता ठीक नहीं है। घाटों पर फिसलन से परेशानी हो रही है। 27 के बाद रोज एक लाख से अधिक कांवरिया आएंगे तो हालत और बदतर हो सकती है।

पानी और बैठने का संकट
गंगा किनारे कांविरयों के लिए दो-तीन पानी का टैंकर लगा हुआ है। जहाज घाट पर पानी के टैंकर की जानकारी के लिए कांवरियों को दुकानदारों की मदद लेनी पड़ रही है। कांवरियों को बैठने और सामान रखने की व्यवस्था नहीं की गयी है। पूजा सामग्री खरीदने पर दुकानदार या पंडा की चौकी पर सामान रखने की सुविधाएं मिल रही है। घाट पर सबसे बड़ी समस्या महिलाओं को कपड़ा बदलने की है। दुकानदारों ने बताया कि दो जगहों पर कपड़ा बदलने के लिए रविवार से काम शुरू किया गया है। जहाज घाट पर एक चापाकल दिखा। दुकानदार और आसपास के लोगों ने बताया कि पानी कुछ देर में लाल हो जाता है।
घाटों पर रोशनी नहीं
घाटों पर रोशनी की व्यवस्था नहीं। 22 तक सभी विभागों को तैयारी पूरी करने का निर्देश दिया गया था। पीएचईडी, राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री और पर्यटन मंत्री के अलावा मुख्य सचिव, राजस्व विभाग के प्रधान सचिव तैयारी की समीक्षा कर चुके हैं। लेकिन स्थिति में बहुत सुधार नहीं दिख रहा है। रविवार को भी कई मोहल्लों में बिजली काटकर मेंटेनेंस का काम किया जा रहा था। नाले की सफाई भी ठीक से नहीं हो पायी है।
दो दिन में सुविधाएं दिखने लगेगी
सरकार ने श्रावणी मेला को राजकीय मेला का दर्जा देने का निर्णय लिया है। लेकिन अब तक की तैयारी में इसकी झलक नहीं दिख रही है। घाटों पर तेजी से कटाव हो रहा है। अजगैबीनाथ के सामने के घाट को खतरनाक घोषित करते हुए बैरिकेडिंग की व्यवस्था करने के लिए बाढ़ प्रमंडल के इंजीनियर को कहा गया है। दोनों घाटों को जेसीबी से समतल किया जाएगा। कटाव पर 24 घंटे निगरानी रखने का निर्देश दिया गया है। दो दिन में सुविधाएं दिखने लगेगी। – आशीष नारायण,एसडीओ सदर

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