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सवर्णों को आरक्षण देकर बिहार में घिरी Modi सरकार, विपक्षी दलों ने बताया चुनावी स्टंट

 

पटनाः लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections) से पहले मोदी सरकार (Modi government) ने बड़ा फैसला लिया है। मोदी कैबिनेट ने सवर्णों (upper castes) को 10 फीसदी आरक्षण दिए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। उनके इस फैसले से बिहार (Bihar) की राजनीति में भी बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है। जहां एक तरफ उनके इस फैसले का स्वागत हो रहा हैं, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दलों ने इसे चुनावी स्टंट बताया है।

 

रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) ने कहा कि मैंने सरकार के समक्ष 50% के आरक्षण को अपर्याप्त बताया। उस समय मुझे यह दलील दी गई कि यह उच्चतम न्यायालय (Supreme court) की तरफ से तय किया गया है और इसमें बदलाव के लिए संविधान में संशोधन करना होगा। आज वह संविधान में बिना किसी संशोधन के लिए इस आशय का निर्णय कैसे ले रहे हैं। यह चुनावी स्टंट है और ‘जुमलेबाजी’ का एक उदाहरण है।बिहार विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) ने कहा कि 15 फीसदी आबादी वाले को अगर 10 प्रतिशत आरक्षण दिया जाता है तो 85 प्रतिशत आबादी वाले अनुसूचित जाति जनजाति और समाज के अन्य पिछडे वर्ग को 90 प्रतिशत आरक्षण मिलना चाहिए। उन्होंने बीजेपी पर ‘जुमलेबाजी’ और इसके जरिए वोटबैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया।वहीं हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतन राम मांझी (Jitan Ram Manjhi) ने केंद्र सरकार के इस निर्णय को देर से लिया गया सही एवं साकारात्मक फैसला बताया। बिहार के मंत्री और जदयू के वरिष्ठ नेता जयकुमार सिंह (Jayakumar Singh) ने इसके लिए मोदी सरकार को धन्यवाद दिया।

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