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सवर्णों को आरक्षण से राजद के पेट में हो रहा दर्द, प्राइवेट सेक्टर में भी लागू हो 60 फीसदी आरक्षण : रामविलास

 

पटना : लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने सवर्ण आरक्षण को देरी से उठाया गया सही कदम बताते हुए निजी क्षेत्र की नौकरियों में भी इसको लागू करने करने की मांग की है. सरकारी क्षेत्र में नौकरियों कम होने पर चिंता प्रकट कर कहा कि 10 फीसदी सवर्ण आरक्षण को मिलाकर निजी क्षेत्र में 60 फीसदी आरक्षण की जरूरत है. यदि यह संभव नहीं है तो कम से कम न्यूनतम आरक्षण लागू कर निजी क्षेत्र में भी इसकी शुरुआत होनी चाहिए.

लोजपा प्रदेश कार्यालय में शुक्रवार को मीडिया से मुखातिब होते हुए केंद्रीय मंत्री ने सवर्ण आरक्षण को ऐतिहासिक बताते हुए केंद्र सरकार की सराहना. उन्होंने कहा कि हम शुरू से गरीब सवर्णों के लिये 15 फीसदी आरक्षण मांग कर रहे थे. सरकार ने दस फीसदी देकर इसकी शुरुआत कर दी है. इस ऐतिहासिक निर्णय से हम खुश हैं. यह संयोग है कि ऊंची जाति के वीपी सिंह ने पिछड़ों को और पिछड़ी जाति के नरेंद्र मोदी ने ऊंची जाति को आरक्षण का लाभ दिया है. केंद्रीय मंत्री ने इन चिंताओं को सिरे से खारिज कर दिया कि सवर्ण आरक्षण अस्पष्ट है और इसको लागू होने में बाधाएं आयेंगी. उन्होंने कहा कि इसके लिये संविधान में धारा 16 (6) जोड़ा गया है. जब हम दोबारा सरकार बनायेंगे तब हम नौवें अनुसूची में इस कानून को रखेंगे इसके बाद इसे कानूनी तौर चुनौती नहीं दी जा सकेगी.

 

राजद पर हमला करते हुए कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को दस फीसदी आरक्षण से राजद के पेट में दर्द हो रहा है. किसी का हिस्सा नहीं छीना जा रहा है तो विरोध क्यों? यह विरोध राजद को उखाड़ फेंकेगा. राजद आगामी लोकसभा की एक भी सीट नहीं जीत रही. रघुवंश प्रसाद, जगदा बाबू और शिवानंद तिवारी का नाम लेकर कहा कि यह नेता किस मुंह से वोट मांगेंगे. सीट शेयरिंग आदि के सवालों की अनदेखी करते हुए लोजपा सुप्रीमो ने कांग्रेस को दो मुंहा सांप बताते हुए कहा कि आरक्षण विधेयक का विरोध करने से महागठबंधन विभाजित हो जायेगा.

 

लोजपा चाहती है कि राम मंदिर विवाद आपसी सहमति या कोर्ट से निस्तारित हो. भारतीय जनता पार्टी की सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी के नेता और केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को दस फीसदी आरक्षण देने का प्रावधान उत्तर प्रदेश और बिहार में एनडीए गठबंधन को जीत दिलाने में मदद करेगा. पिछड़ी जातियों के सर्वाधिक जनाधार वाली पार्टियों द्वारा जनसंख्या के आधार पर आरक्षण की मांग के सवाल पर कहा कि ऐसी पार्टियां तब क्यों नहीं आरक्षण के प्रावधानों को बदलती जब वे सत्ता में होती हैं. उन्होंने बिल के विरोध में वोटिंग क्यों नहीं की? एनडीए की धारा तेज है. जब धारा तेज होती है तो बड़े-बड़े उखड़ जाते हैं.

 

 

 

 

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