सहरसा के नीरज ने लिख डाली फिल्म ‘बागी-2’ की पटकथा,शेयर किया अपना अनुभव

सहरसा के नीरज ने लिख डाली फिल्म ‘बागी-2’ की पटकथा,शेयर किया अपना अनुभव

5th April 2018 0 By Kumar Aditya

30 मार्च को रिलीज हुई फिल्म ‘बागी-2’ सिनेमाघरों में धूम मचा रही है. शुरुआत के चार दिनों में ही सवा करोड़ रुपये से भी अधिक का बिजनेस करने वाले इस ब्लॉक बस्टर, स्मास व सुपर-डुपर हिट फिल्म की पटकथा सहरसा के नीरज कुमार मिश्रा ने लिखा है. बागी-2 की सफलता के साथ ही नीरज फिल्मी दुनिया के मशहूर पटकथा लेखकों में शामिल हो गया है. बॉक्स ऑफिस पर हिट होते ही फिल्म के निर्माता साजिद नाडियावाला, निर्देशक अहमद खान, मुख्य अभिनेता टाइगर श्रॉफ सहित पूरी फिल्म यूनिट बधाई दे रही है.

 

कौन बनेगा करोड़पति से की कैरियर की शुरुआत:

नीरज सहरसा के गौतम नगर के रहनेवाले हैं. पिता रतीश चंद्र मिश्रा कोसी क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक में प्रबंधक थे. रिटायर होने के बाद यहीं रह कविताओं की रचना व काव्य पुस्तिका के प्रकाशन में लगे हैं. नीरज की प्रारंभिक शिक्षा सरस्वती बाल विद्यालय और उच्च शिक्षा जिला स्कूल से हुई. दसवीं कक्षा में ही उसे पढ़ाई के लिए पूर्णिया जाना पड़ा. कॉलेज की पढ़ाई के लिए नीरज पटना, फिर शिलॉन्ग, फिर दिल्ली गया. हालांकि इस बीच घर वाले नीरज को इंजीनियरिंग या बैंकिंग की ओर जाने का दवाब देते रहे. लेकिन, उधर कोई रुझान नहीं होने के कारण राजनीति शास्त्र से स्नातक करने के बाद सीधे डिफेंस सर्विस की तैयारी शुरू कर दी. लेकिन, सफलता नहीं मिली. साल 2000 में नीरज को ‘कौन बनेगा करोड़पति’ सीजन वन के सेट पर काम करने का मौका मिला. उसके बाद वह कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा. वह आगे बढ़ता गया और मुंबई को ही अपना ठिकाना बना लिया.

 

फर्स्ट ब्लड ने खींचा सिनेमा की ओर:

 

नीरज कहते हैं कि सहरसा से लेकर पूर्णिया तक के सिनेमा हॉल में उसने कई फिल्में देखी. लेकिन, उसने यह कभी नहीं सोचा था कि जिंदगी एक दिन उसे उसी इंडस्ट्री तक पहुंचा देगी, जहां ये फिल्में बनती हैं. शुरुआती दौर में सामान्य बच्चे की तरह उसे भी उत्सुकता बनी रहती थी कि परदे के पीछे की दुनिया कैसी होती है. वहां क्या-क्या होता है. नीरज बताते हैं कि कई बार ऐसी भी सोच आती थी कि अगर परदे के पीछे चले गये तो न सिर्फ अभिनेताओं से मिल सकेंगे, बल्कि उस दुनिया का हिस्सा भी बन जायेंगे. पिता से सारी तकनीकी जानकारी मिलने के बाद उतावलापन तो समाप्त हो गया पर उत्सुकता कम नहीं हो पायी. वह अब भी फिल्मी दुनिया के हिस्सा बनना चाहते थे. नीरज कहते हैं कि 1995 में पटना में देखी अमेरिकी फिल्म ‘फर्स्ट ब्लड’ एक नये खून का स्वाद चखने जैसा था. उसने यहीं से धीरे-धीरे वर्ल्ड सिनेमा को कुरेदना शुरू किया. 2004 में वे पूरी तरह मुंबई शिफ्ट हो गये, जहां पहली बार एक स्टूडेंट की तरह न सिर्फ वर्ल्ड सिनेमा को देखा बल्कि, उसकी बारीकियों को समझना शुरू कर दिया. उन्होंने फिल्म के स्वाध्याय के साथ शॉर्ट फिल्म्स भी लिखना शुरू कर दिया. इसी दौरान नीरज ने टेलीविज़न में 20 से भी अधिक शोज किये. साल 2012 में नीरज ने बतौर लेखक, निर्देशक ‘गांधी : द साइलेंट गन’ बनाया, जिसे फिल्म फेस्टिवल सर्किट में काफी सराहा गया. इस फिल्म को दादा साहब फाल्के सहित अन्य कई पुरस्कार भी मिले. नीरज ने धीरे-धीरे फीचर फिल्म्स भी लिखना शुरू कर दिया. फंड जुगाड़ के सिलसिले में स्टूडियोज, डायरेक्टर्स और प्रोड्यूसर्स से मिलने लगे. उनकी मुलाकात डायरेक्टर जयदीप सेन से हुई. इन्होंने नीरज को अहमद खान और साजिद नाडियाडवाला से मिलाया और इस तरह बागी-2 की पटकथा लिखने का मौका मिला.

 

…अभी तो स्टार्ट किया है

नीरज कहते हैं कि बागी 2 उनकी पहली कमर्शियल फिल्म है. वे आज भी उसी तरह उत्साहित और उत्सुक हैं. जैसे 20 साल पहले हुआ करते थे. फिल्म राइटर नीरज कहते हैं कि यह तो एक शुरुआत है. अभी लंबा सफर तय करना है. बहुत कुछ सीखना है. बहुत कुछ ढूंढ़ना है. उन्होंने बताया कि वे आज जहां भी खड़े हैं. अपनी मां के आशीर्वाद से, अपने पिता के मार्गदर्शन से, परिवार और दोस्तों के स्नेह से. उन्होंने कहा कि सिनेमा ही उनकी कला है. सिनेमा से ही उनका अस्तित्व है. बागी-2 का एक डायलॉग बोलते नीरज ने कहा कि ‘इतनी जल्दी क्या है, अभी तो मैंने स्टार्ट किया है’.

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