सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों से सुधरेगी पटना की सेहत

राजधानी के सरकारी अस्पतालों में सुपर स्पेशियलिटी की सुविधा बहाल करना समय की मांग है। राज्य के कोने-कोने से राजधानी में इलाज कराने आने वाले मरीजों का सामान्य इलाज तो हो जाता है, लेकिन गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए दिल्ली एवं मुम्बई के अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ता है।

हालांकि इस दिशा में राजधानी के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आइजीआइएमएस) ने पहल की है, लेकिन उसे और विस्तार देने की जरूरत है। सम्पन्न तबके के लोग तो निजी अस्पतालों में अपना इलाज करा लेते हैं, लेकिन समाज का गरीब तबका बेहतर इलाज से वंचित है। सरकार को इस ओर विशेष ध्याहन देना चाहिए।

पीएमसीएच का कम करना होगा दबाव
प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (पीएमसीएच) में प्रतिदिन लगभग 3000 मरीज ओपीडी में इलाज कराने आते हैं। इसके अलावा इमरजेंसी में प्रतिदिन 300 से 400 मरीजों का इलाज होता है। मरीजों के इस दबाव को कम करने की जरूरत है। इसके लिए राजधानी के अन्य अस्पतालों को विकसित करना होगा ताकि मरीज सिर्फ पीएमसीएच पर निर्भर न रहें।

शुरू हो सुपर स्पेशियलिटी की सुविधा
पीएमसीएच को सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बनाने की जरूरत है। इस अस्पताल का ज्यादातर मैन पावर अभी छोटी-मोटी बीमारियों के इलाज में खर्च हो रहा है। सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बन जाने से गंभीर बीमारियों के मरीजों को दूसरे राज्यों में जाने की जरूरत नहीं होगी। यहां कई वरिष्ठ डॉक्टर हैं, बस जरूरत उन्हें इंफ्रास्ट्रक्चर मुहैया कराने की है।

आइजीआइसी में शुरू हो बाईपास सर्जरी
राजधानी के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आइजीआइसी) में बाईपास सर्जरी शुरू करना बहुत जरूरी है। अभी तक राज्य के किसी भी सरकारी अस्पताल में बाईपास सर्जरी की व्यवस्था नहीं है, जबकि प्रति माह 500 लोगों को बाईपास सर्जरी की जरूरत पड़ रही है। दिल्ली एम्स में भी बाईपास सर्जरी के लिए इतनी ज्यादा भीड़ है कि वहां पर एक-दो साल बाद नंबर मिलता है।

आइजीआइएमएस में हो लिवर और हार्ट प्रत्यारोपण की सुविधा
राजधानी के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आइजीआइएमएस) की स्थापना लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधा प्रदान करने के लिए की गई थी। संस्थान ने उस दिशा में कदम बढ़ाया है, लेकिन उसकी गति काफी धीमी है और उसे तेज करने की जरूरत है। यहां पर अब तक हार्ट एवं लिवर प्रत्यारोपण का काम शुरू नहीं हो पाया है।

लिवर प्रत्यारोपण के लिए लोगों को बाहर जाना पड़ रहा है। संस्थान में इसकी सुविधा बहाल करने की जरूरत है। इससे राज्य के मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। लिवर प्रत्यारोपण की सुविधा राजधानी के न तो निजी अस्पताल में हैं, न ही सरकारी अस्पतालों में।

एम्स पटना में खुले इमरजेंसी
पटना एम्स से लोगों को काफी उम्मीद थी। लगभग 100 एकड़ जमीन देकर इसकी स्थापना फुलवारीशरीफ में कराई गई थी, लेकिन उसका अपेक्षित लाभ राज्य के लोगों को नहीं मिल रहा है। अभी तक पटना एम्स में इमरजेंसी की सुविधा बहाल नहीं की जा सकी है। इसे अविलंब बहाल करने की जरूरत है।

एम्स में इमरजेंसी की सुविधा बहाल होने से राजधानी के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। इससे दिल्ली एम्स में होने वाली भीड़ को रोकने में भी काफी मदद मिलेगी। एम्स पटना में बेहतर चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई जाए, तो यह अस्पताल सूबे के मरीजों के लिए वरदान साबित हो सकता है।

– एसएस झा

(महावीर वात्सल्य अस्पताल के निदेशक एसएस झा पटना के पुनाईचक के रहने वाले हैं। खुद हड्डी रोग विशेषज्ञ हैं और फिलहाल बच्चों के विशेष अस्पताल महावीर वात्सल्य के निदेशक हैं।)

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