सृजन घोटाले में नया खुलासा, ढाई करोड़ के गबन की एक और FIR दर्ज

सृजन संस्था द्वारा साढ़े 14 सौ करोड़ रुपये सरकारी राशि घोटाले का दायरा बढ़ता जा रहा है। बिहपुर प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी सत्येंद्र सिंह ने सोमवार को सृजन घोटाले में गबन और वित्तीय अनियमितता की एक और प्राथमिकी कोतवाली थाने में दर्ज कराई।

जिलाधिकारी के आदेश पर हुई थी जांच 

बिहपुर प्रखंड ने जिलाधिकारी आदेश तितरमारे के निर्देश पर इंदिरा आवास योजना के खातों की जांच कराई। तीन सदस्यीय जांच दल में प्रखंड कार्यालय के लिपिक सुमन कुमार और गोपाल ठाकुर समेत प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी प्रवीण कुमार भारती ने अपनी जांच रिपोर्ट बीडीओ को सौंपी थी।

 

जांच टीम ने इंदिरा आवास योजना से संबंधित रोकड़ बही, बैंक द्वारा उपलब्ध कराई गई खाता विवरणी एवं बैंक खाता के पासबुक की जांच की थी। जांच के दौरान सरकारी बैंक खाते से राशि की अवैध निकासी तथा हस्तांतरण और वित्तीय अनियमितता की बात उजागर हुई थी।

 

निकासी से ज्यादा रुपये कर दिए खाते में जमा

बैंक ऑफ बड़ौदा में बिहपुर प्रखंड के 21 जुलाई 2008 से 11 दिसंबर 2009 के बीच पासबुक में  2.34 करोड़ रुपये प्रिंट है। जबकि जांच के लिए निकाले गए बैंक स्टेटमेंट में यह राशि बढ़कर 2.5 करोड़ के करीब हो गई। खाते में अज्ञात स्रोतों से 15.72 लाख रुपये अतिरिक्त जमा कर दी गई जांच के दौरान यह गड़बडिय़ां पकड़ में आई हैं।

 

पूर्व में ऑडिट के दौरान भी यह गड़बड़ी नहीं उजागर हो पाई थी। इसमें बैंक और प्रखंड समेत अन्य कर्मियों की मिलीभगत से घालमेल किया गया था।

 

गबन के रुपये की भरपाई के लिए बैंक ने जमा कर दिए ज्यादा पैसे

21 जुलाई 2008 को प्रखंड द्वारा 31.92 लाख रुपये सरकारी खाते में चेक द्वारा जमा किया गया। इसके अलावा स़ृजन सहयोग समिति, सबौर के खाता से 24 जुलाई 2009 को दो चेक संख्या से करीब 23 हजार और  करीब 40 हजार रुपये जमा किया गया था। ये राशि पासबुक में दर्ज है।

 

मगर जांच के लिए निकाले गए स्टेटमेंट में इसका कोई जिक्र नहीं मिला। इसी तरह कुल 32.56 लाख रुपये की राशि बैंक स्टेटमेंट में दर्ज नहीं है। इस हेराफेरी के एवज में बैंक द्वारा 48.28 लाख रुपये अज्ञात स्रोतों से 21 जुलाई 2008 और 24 जुलाई 2009 को दो तीन किश्तों में जमा कर दी गई।

 

खाता बंद होने के बाद भी राशि होती रही जमा

बैंक ऑफ बड़ौदा में सरकारी खाता 24 जुलाई 2009 को ही बंद कर दी गई। इसके बाद भी गबन की राशि की भरपाई के लिए इसमें करीब 27 लाख रुपये जमा किए गए । 25 अगस्त 2009 और एक सितंबर 2009 को क्रमश: 11.28 लाख रुपये और 15.75 लाख रुपये जमा किए गए।

 

वहीं ब्याज की राशि भी 21 जुलाई 2008 से 11 दिसंबर 2009 के बीच बैंक द्वारा पूर्व के पासबुक में करीब 46 हजार रुपये दिखाया गया है। जबकि निकाले गए स्टेटमेंट में उक्त अवधि में यह राशि करीब 34 हजार रुपये है। इस प्रकार करीब 11 हजार रुपये की राशि अज्ञात स्रोतों से जमा करा दी गई।

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