राज्य सरकार समान काम, समान वेतन और सेवा नियमित करने की मांग को लेकर बेमियादी हड़ताल कर रहे चिकित्सा कर्मियों के सामने झुकने को तैयार नहीं है। हड़ताली चिकित्सा कर्मियों को चौबीस घंटे का अल्टीमेटम दिया गया है।

शुक्रवार की शाम पांच बजे तक काम पर नहीं आने वाले कर्मियों की सेवा खत्म कर उनके स्थान पर नई नियुक्ति प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। दूसरे कर्मियों को काम करने में बाधा उत्पन्न करने वालों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाएगी।

स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव आर के महाजन ने गुरुवार को पत्रकारों से कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संविदा पर 17 हजार चिकित्सा कर्मी कार्यरत हैं। इनमें करीब 9 से 10 हजार कर्मी हड़ताल पर हैं।  हड़ताली कर्मी आशा को भी अपने साथ जोड़ रहे हैं जबकि आशा को हड़ताल से कोई लेना देना नहीं है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक ही मानदेय तय किया जाता है।

राज्य सरकार समान काम, समान वेतन की मांग पूरी नहीं कर सकती है। राज्य सरकार द्वारा उनकी सेवा अवधि को एक साल से बढ़ाकर तीन साल करने, पांच वर्ष की सेवा पूरी करने पर पंद्रह फीसद, तीन साल की सेवा पूरी करने पर पांच फीसद प्रोत्साहन राशि देने का फैसला किया गया है। पहले से मिल रही पांच पांच फीसद प्रोत्साहन राशि यथावत रहेगी।

महाजन ने कहा कि विभाग ने 15 हजार से अधिक मानदेय प्राप्त करने वालों को ईपीएफ से कवर करने और लक्ष्य से अधिक उपलब्धि करने वालों को अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि देने का प्रस्ताव सरकार को भेजा है। शुक्रवार की शाम पांच बजे तक काम पर नहीं आने वाले कर्मियों की सेवा समाप्त कर दी जाएगी और नई नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इससे संबंधित निर्देश सभी जिलाधिकारी को दे दिए गए हैं। इस मौके पर राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक लोकेश कुमार भी उपस्थित थे।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संविदा पर कार्यरत चिकित्सा कर्मियों की संख्या- 17 हजार
हड़ताली चिकित्सा कर्मियों की संख्या- 9 से 10 हजार
आयुष डॉक्टर- 3 हजार
एएनएम – 6. 8 हजार
जीएनएम- 4 सौ

राज्य सरकार संविदा चिकित्सा कर्मियों  की मांगों पर गंभीरता से विचार कर रही है। सरकार उनके साथ है। उनके हित में कई फैसले किए गए हैं। उनकी हड़ताल की वजह से स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। मरीजों के हित में वे तत्काल काम पर आ जाएं।
मंगल पांडेय, स्वास्थ्य मंत्री

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