20 से कर सकेंगे गंगा नदी में मोटरबोट से सैर तैयारी

20 से कर सकेंगे गंगा नदी में मोटरबोट से सैर तैयारी

9th November 2018 0 By Kumar Aditya

फिलहाल मायागंज अस्पताल के पीछे काली विसर्जन घाट से शुरू होगी सेवा, डीएम करेंगे उद‌्घाटन
गंगा में मोटरबोट से सैर करने की दिशामें पहल तेज हो गई है। अभी अस्थाई रूप से मायागंज अस्पताल के पीछे स्थित काली विसर्जन घाट से इसकी शुरुआत होगी। वहीं से वन व पर्यावरण विभाग की ओर से 24 सीटर मोटरबोट चलेगा। वहां से अलग-अलग दिन अलग-अलग रूट पर मोटरबोट चलेगा, जिससे उस इलाके के खूबसूरत नजर और डॉल्फिन को लोग देख सकेंगे। शहर से सुल्तानगंज, कहलगांव व कभी नवगछिया की ओर मोटरबोट के जरिए लोगों को गंगा में सैर कराने के लिए ले जाने की योजना है। विभाग ने संभावना जताई है कि इसकाउद्घाटन 20 नवंबर को डीएम करेंगे। इसके बाद यह सुविधा व सेवा शहरवासियों के लिए शुरू हो जाएगी। बनेगा बुकिंग काउंटर, बुनियादी सुविधाओं की भी होगी व्यवस्थाजिला प्रशासन की ओर से जमीन विभाग को उपलब्ध कराने के बाद वहां इसके लिए दो कमरे का एक मकान बनेगा। साथ ही वहां बुकिंग काउंटर बनेगा, जहां से लोग मोटरबोट की सुविधा लेने के लिए टिकट कटा सकेंगे। इसके अलावा बाथरूम बनेगा। गंगा में सैर करनेवालों के वहां बैठने के लिए यात्री शेड का निर्माण हाेगा। साथ ही पेयजल से लेकर रोशनी तक की व्यवस्था की जाएगी। विभाग के रेंजर ब्रजकिशोर सिंह ने बताया किफिलहाल 20 नवंबर को उद्घाटन के लिए तैयारी चल रही है। अभी काली विसर्जन घाट से मोटरबोट चलेगा। रूट और किराया तय करने की प्रक्रियाचल रही है। उद्घाटन से पहले किराया व रूट भी तय हो जाएगा। इसके बाद जब बरारी पुल घाट के पास प्रशासन की ओर से जमीन मिल जाएगी तो आगे वहां निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।बरारी पुल घाट के पास बनेगा पड़ाव, सप्ताहभर में जमीन का सत्यापन स्थाई व्यवस्था के लिए वन व पर्यावरण विभाग ने जिला प्रशासन से बरारी पुल घाट के पास पांच एकड़ जमीन की मांग की है। इसके लिए विभाग से प्रशासन को प्रस्ताव भेजा गया है। जानकारी के मुताबिक जिला प्रशासन की ओर से बरारी पुल घाट में जमीन चिन्हित कर ली गई है। अब उसकासत्यापन बाकी है। संभावना जताई जा रही है कि सप्ताहभर के अंदर जमीन का सत्यापन कर उसे वन व पर्यावरण विभाग को ट्रांसफर कर दिया जाएगा। एडीएम राजेश झा राजा ने बताया कि वन विभाग से प्रस्ताव मिला है। जल्द ही जमीन का सत्यापन कर लिया जाएगा। इसके बाद आगे की प्रक्रिया होगी। फिर जमीन विभाग को हैंडओवर कर दिया जाएगा।

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