जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा में बुधवार सुबह पांच बजे आतंकियों के साथ मुठभेड़ में वायुसेना गरुड़ कमांडो कॉर्पोरल निलेश कुमार शहीद हो गए। वे सुल्तानगंज के रहने वाले थे। वह बेटी व पत्नी के साथ चंडीगढ़ स्थित एयरफोर्स कैंप में रहते थे। विभागीय निर्देश पर जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में आर्मी कैंप में ट्रेनिंग देने गए थे। वे परिवार के साथ वक्त बिताने के लिए चार अक्टूबर को चंडीगढ़ एयरफोर्स कैंप आए थे। इस दौरान उन्होंने अपने परिवार के साथ समय व्यतीत किए था। बिलखती दादी ने कहा- अब नहीं रही जीने की इच्छा…

– बेटे की शहादत पर पिता तरुण सिंह को गर्व है लेकिन उनके आंसू थम नहीं रहे हैं। नीलेश के उधाडीह गांव में उनके घर पर भीड़ उमड़ पड़ी थी।

– तीन भाई-बहनों में सबसे बड़े नीलेश का जन्म 10 फरवरी 1986 को हुआ था। उन्होंने 2004 में वायुसेना की नौकरी ज्वाइन की थी।

– 2001 में उच्च विद्यालय कुमारपुर कटहरा से सेकेंड डिवीजन में मैट्रिक की परीक्षा पास की थी। इसके बाद भागलपुर के परबत्ती में छोटे भाई नितेश कुमार के साथ रहकर आगे की पढ़ाई की।

– 2003 में हवेली खड़गपुर स्थित नरेंद्र सिंह काॅलेज से इंटर (साइंस) में प्रथम श्रेणी से पास किया। बड़े भाई नीलेश से प्रेरित होकर नितेश कुमार भी एक साल बाद आर्मी ज्वॉइन कर लिया।

– छोटी बहन प्रियंका की शादी रेलवे में चालक के पद पर तैनात मुकेश मेहता से हुई। किसान पिता दोनों बेटे के देशसेवा में जाने के बाद गृहस्थी संभाले हुए हैं।

– पोता नीलेश की शहीद होने की खबर सुनते ही 80 वर्ष की उम्र पार कर चुकी दादी पार्वती देवी कहती हैं कि 1968 में पति सौदागर सिंह की मौत होने के बाद बेटा और पोता-पोती को देखते हुए बची जिंदगी गुजार रही थी।

– लेकिन पोता नीलेश की शहादत ने जीने की इच्छा समाप्त कर दी। पंचायत के मुखिया संजीव कुमार सुमन ने बताया कि शहीद का पार्थिव शरीर विशेष विमान से चंडीगढ से दिल्ली के रास्ते पूर्णिया के चूनापुर हवाई अड्डे पर लाया जा रहा है। गुरुवार सुबह सात बजे चंडीगढ़ से उड़ान भरी जाएगी। पूर्णिया से सड़क मार्ग होकर सुल्तानगंज स्थित शहीद के घर पर पार्थिव शरीर को लाया जाएगा।

युवाओं को करते थे प्रेरित

– निलेश मई 2017 में 15 दिन की छुट्टी पर अपने गांव आए थे। दोस्त सुशांत कुमार ने बताया कि जब वह गांव में आते थे तो गांव के युवकों को शिक्षा प्राप्त कर देश के लिए कुर्बान होने और सेना में जाने के लिए प्रेरित करते थे।

– हमारा देश हरा भरा रहे यह सोच थी निलेश कुमार की। गांव के लोगों का कहना है कि नीलेश जब भी गांव आते थे पौधे लगाने और हरियाली लाने की बात करते थे। वह जब भी छुट्टी पर आते थे, 10-20 पेड़ अवश्य लगाते थे।

– गांव के महादेव कुमार,   दीपक कुमार, सुशांत कुमार, गौरव कुमार और अरुण कुमार ने बताया कि निलेश काफी मिलनसार और शर्मीले स्वभाव के थे, लेकिन वह देश के लिए आज शहीद हुए हैं यह हमलोगों के लिए गर्व की बात है। – हमलोगों को इस बात की कमी खटक रही है कि अब उनके जाने के बाद गांव का एक होनहार लड़का हमारे बीच से चला गया।

बचपन की याद आते ही फफक पड़े दोस्त अमृश

– बचपन में साथ बिताए समय को याद कर गांव के दोस्त अमृश फफक पड़े। अमृश ने बताया कि छुट्टी आने पर नीलेश मेरे ही साथ अक्सर घूमने-फिरने निकलते थे। बाजार भी साथ जाते थे।

– बचपन से साथ-साथ पढ़ाई करने वाले दोस्त अमृश ने बताया कि नौकरी में जाने से पहले मैं और नीलेश और उनका छोटा भाई नितेश भागलपुर के परबत्ती में रहकर पढ़ाई करते थे।

– इंटर के बाद वहीं से वह एयरफोर्स ज्वाइन कर लिया। नीलेश ने जॉब के दौरान ओपेन विश्वविद्यालय से ग्रेजुएट की डिग्री प्राप्त की। घर आने पर नीलेश मेरे साथ गांव के लोगों से मिलते-जुलते थे।

– हमेशा गांव की तरक्की को लेकर अपनी बात कहा करते थे। सभी से मैत्रीपूर्ण व्यवहार करते थे। बच्चों व युवकों से पढ़ाई पूरी करने की बात कहा करते थे।

– आज दोस्त नीलेश की प्रेरणा पाकर गांव के डेढ़ दर्जन से अधिक युवक डिफेंस विभाग में कार्यरत होकर देशसेवा कर रहे हैं, जो अनुकरणीय है। दोस्त अमृश ने शहीद नीलेश की याद में एक स्मारक बनाने की बात कही।

– उधर, शहीद नीलेश के घर तक जाने वाली सड़क मार्ग की सभी गलियां सुनसान है। शहीद की आत्मा की शांति को लेकर भजन-कीर्तन शुरू कर दिया गया है।

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