DIG विकास वैभव के मुंगेर छोड़ने पर रो उठा आम लोगों का दिल, कहा- काश सभी पुलिसवाले…

मुंगेर : बिहार के वरिष्ठ आइपीएस अधिकारी और राष्ट्र के पौराणिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को लेकर शोध करने वाले भागलपुर रेंज के डीआइजी विकास वैभव ने हाल में मुंगेर डीआइजी का पदभार छोड़ा. अब वे सिर्फ भागलपुर रेंज के डीआइजी रहेंगे. सरकार ने उन्हें मुंगेर डीआइजी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा था. विकास वैभव एक अलग तरह की पुलिसिंग के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने जहां-जहां अपना योगदान दिया. वहां-वहां अपनी एक ऐसी छाप छोड़ दी, जिसे आज भी लोग अपनी स्मृति में संजोकर उन्हें याद करते हैं. वह पुलिसिंग के दौरान लोगों से ऐसे जुड़े रहे कि उनके चाहने वालों का कुनबा लगातार बढ़ता रहा. मुंगेर से वह विदा क्या हुए, सोशल मीडिया में तूफान सा आ गया. कई लोग उनके कार्यकाल को याद कर भावुक होने लगे, तो कईयों ने आशीर्वचन के रूप में उनके व्यक्तित्व से जुड़ी बातों को याद कर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की.

कर्तव्य के प्रति समर्पित, संवेदनशील और सार्थक पुलिसिंग का अनोखा संगम उनके व्यक्तित्व में चार चांद लगाता है. उन्होंने अपने कार्यकाल में हमेशा इस बात का ख्याल रखा कि पुलिस जिनके लिए बनी हुई है और पुलिस का जो कार्य है, उसके साथ सीधा संवाद लगातार कायम रहे. उन्होंने भागलपुर में जनता से संवाद कर एक ऐसी पुलिसिंग की शुरू की जिसका परिणाम कम दिनों में दिखने लगा और भागलपुर के क्राइम का ग्राफ नीचे गिरने लगा. उन्हें आम लोगों से मिलने वाली सूचनाओं हमेशा ज्यादा भरोसा रहा और विभिन्न माध्यमों से मिलने वाले संदेशों के जरिये उन्होंने पुलिसिंग को धारदार बनाया और आज की तारीख उनसे, जो भी फरियादी एक बार मिल चुका है. मुंगेर से उनकी विदाई पर उसका दिल रो रहा है. फेसबुक पर दो लाख लोग उन्हें फॉलो करते हैं. जिनमें आम लोगों के साथ छात्र, छात्राएं, इतिहासकार, प्रोफेसर, पत्रकार और समाज के हर तबके से जुड़े लोग शामिल हैं. यही कारण है कि बगहा में लोगों ने किसी जनप्रतिनिधि की जगह, उनके नाम का चौराहा बना दिया.

विकास वैभव को जानने वाले कहते हैं कि उनके व्यक्तित्व में एक अजीब तरह की पवित्रता और संवेदना है. यह दो ऐसी चीजें हैं, जो लोगों को आम लोगों से काफी करीब ले जाती हैं. उनका व्यक्तित्व पुलिसकर्मी से पहले परकाया प्रवेश वाले व्यक्ति का है. एक ऐसा व्यक्ति जो दूसरा जैसा-महसूस करते हैं, वैसा वह भी करे. वह लोगों की समस्याओं और उनकी परेशानियों को मिलते ही भांप लेते हैं. उनमें एक तरफ कानून का पालन करवाने वाला कड़क पुलिस अधिकारी भी वास करता है, वहीं दूसरी ओर एक संवेदनशील इंसान भी. वह एक ऐसे इंसान हैं, जिनमें राष्ट्र, धरोहर, इतिहास और वेद, पुराणों के प्रति अदम्य जिजीविषा है. वहीं, अपनी भारत भूमि के पोर-पोर को समझने की उत्कंठा है. वहीं दूसरी ओर सर्वहारा और समाज के अंतिम वर्ग के लिए उतना ही प्रेम है.

मुंगेर से तबादला होने के बाद उन्होंने अपने फेसबुक पोस्ट में एक भावुक पोस्ट लिखा. उन्होंने लिखा कि मुंगेर डीआइजी की भूमिका में आज कार्यालय का अंतिम दिवस रहा. लगभग 8 माह के इस अतिरिक्त प्रभार के दौरान जीवन के कुछ अति व्यस्ततम क्षणों में क्षेत्रान्तर्गत यात्राओं का क्रम सतत् जारी रहा तथा लगातार जन समस्याओं के निष्पादन के क्रम में समय के तीव्र प्रवाह का भी स्पष्ट अनुभव नहीं हो सका. मुंगेर क्षेत्र में बीते पलों की मधुर स्मृतियां मन में सदैव अक्षुण्ण बनी रहेंगी, चूंकि इस संक्षिप्त परंतु अत्यंत व्यस्त कार्यकाल में भी 10 सहस्त्र से अधिक क्षेत्रवासियों से कार्यालय में सीधे साक्षात्कार का अवसर मिला. जिसमें, अन्य जिलों के साथ-साथ उल्लेखनीय रूप से अपने गृहक्षेत्र को भी और समीप से समझने का अवसर मिला.

उन्होंने आगे लिखा कि इन बीते पलों में अनेक सभाओं को भी संबोधित करने का अवसर मिला जिनकी स्मृतियां आज मानस पटल पर तब उभरने लगीं जब प्रभार समर्पण के पश्चात मुंगेर से भागलपुर लौट रहा था और मन भावुक सा हो रहा था. इस अवसर पर सभी मुंगेर क्षेत्रवासियों का हार्दिक अभिनंदन करते हुए सर्वशक्तिमान से क्षेत्र के उज्जवल भविष्य की मंगलकामना करता हूं. वह कुछ दिनों की ट्रेनिंग के लिए हैदराबाद जा रहे हैं. मुंगेर ही नहीं बिहार के जिन इलाकों में वह पदस्थापित रहे, लोगों के दिलों में रहे. सूचना उन तक फोन से पहुंचे या मैसेज से, फेसबुक पर शिकायत मिले या व्हाट्सएप पर कार्रवाई होती थी. लोगों को इंसाफ मिलता था. अब मुंगेर के लोग कह रहे हैं, अब घर जैसी शिकायत उनका कौन सुनेगा.

जब उनको मुंगेर का प्रभार दिया गया, तब उन्होंने कहा था कि 12 साल पहले फिल्ड पुलिसिंग का मेरा पहला दिन मुंगेर में ही बीता था, जब तत्कालीन पुलिस अधीक्षक द्वारा राष्ट्रीय हितों के प्रति सर्वोच्च बलिदान दिया गया था. मुंगेर क्षेत्र का प्रभार मिलने पर पुरानी हृदयस्पर्शी स्मृतियां जहां मानस पटल पर उभर रही हैं. उस पहले दिन के अनुभव को पुनः साझा कर रहा हूं. बढ़े दायित्वों में भी पुलिस की भूमिका पर मेरा विशेष ध्यान रहेगा. क्षेत्र की जनता से परिवर्तन में सहयोग की अपेक्षा है. जय हिंद. जिस वक्त विकास वैभव फिल्ड पुलिसिंग करने मुंगेर क्षेत्र में थे, ठीक उसी वक्त नक्सलियों के हमले में 5 जनवरी 2005 को तत्कालीन एसपी केसी सुरेंद्र बाबू शहीद हो गये थे. विकास वैभव के मुंगेर छोड़ने से आम लोग काफी उदास हैं, लेकिन उनके दिलों में उनके लिए यादें भरी हुई हैं.

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