आजकल 80 प्रतिशत पैसे का लेन-देन डिजिटल हो गया है। भारत में डिजिटल इंडिया के तहत एक केले बेचने वाला भी क्यूआर कोड से ऑनलाइन पेमेंट लेता है।

मुख्य तथ्य

  • ऑनलाइन फ्रॉड पर रोकथाम  लगाने के लिए आरबीआई कर रहा प्लानिंग
  • डिजिटा नामक एप लॅान्च कर अपराध पर कसा जाएगा शिकंजा
  • फ्रॅाड को पकड़ने में भी मिलेगी मदद, जानें क्या है माजरा

आजकल 80 प्रतिशत पैसे का लेन-देन डिजिटल हो गया है. भारत में डिजिटल इंडिया के तहत एक केले बेचने वाला भी क्यूआर कोड से ऑनलाइन पेमेंट लेता है. लेकिन इन दिनों ऑनलाइन फ्राड के चक्कर में डिजिटली लेन-देन करने में लोग कतरा रहे हैं. समस्या को गंभीरता से लेते हुए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने डिजिटल फ्रॅाड को रोकने के लिए अहम तकनीक निकाली है. इसके लिए बहुत जल्द डिजिटा नामक एप लॅान्च किया जाएगा. जिसके बाद डिजिटली फ्रॅाड पर लगाम लगाई जा सकती है. यही नहीं ऑनलाइन फ्रॅाड को पकड़ने में भी यूजर्स को मदद मिलेगी…

जानें क्या है आरबीआई की ‘डिजिटा’? 
डिजिटा की फुल फॅार्म की बात करें तो डिजिटल इंडिया ट्रस्ट एजेंसी (Digital India Trust Agency) है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक डिजिटा यह डिजिटल वर्ल्ड में अवैध एप की जांच पड़ताल करेगा. यही नहीं वित्तीय जगत में जिन एप के पास ‘डिजिटा’ का वेरिफिकेशन नहीं होगा, उन्हें अवैध माना जाएगा. साथ ही सरकारी से लेकर प्राइवेट तक सभी कंपनीज को डिजिटा से अपने एप की जांच करानी होगी. जिसके बाद डिजिटा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को रिपोर्ट सौंपेगी. ग्राहकों को सही एप पहचानने में ‘डिजिटा’ से काफी मदद मिलने वाली है।

फ्रॅाड पकड़ने में मिलेगी मदद
आपको बता दें कि डिजिटा के माध्यम से सही और गलत एप की आसानी से पहचान हो जाएगी. डिजिटल लोन सेक्टर में भी पारदर्शिता  आएगी. आपको बता दें कि आजकल सोशल मीडिया और गूगल पर सैंकड़ों लोन एप हैं. जो लोगों को खून चूस रहे हैं. यानि बिना नियम कानून के ये लोग कर्जदाताओं से पेनल्टी वसूल रहे हैं. साथ ही इनकी बात न मानने पर सिबिल खराब कर रहे हैं.लोग ऐसे फर्जी लोन एप के चक्कर में फंसकर बहुत परेशान हुए हैं. समस्या को ध्यान में रखते हुए ही आरबीआई ने डिजिटा लाने पर चर्चा शुरू की है.  जिसके बाद आपको ऑनलाइन फ्रॅाड पर लगाम लग जाएगी।