लोक आस्था का महापर्व छठ शुक्रवार (17 नवंबर) को नहाय-खाय के साथ शुरू होगा। चार दिवसीय महापर्व के पहले दिन व्रती गंगा स्नान के बाद भगवान भास्कर को प्रणाम कर कद्दू-भात का भोग लगाएंगे और संकल्प लेकर प्रसाद ग्रहण करेंगे।

छठ पर्व के दूसरे दिन शनिवार शाम को व्रती खरना करेंगे। इसके साथ ही 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हो जाएगा। रविवार को अस्ताचलगामी सूर्य को व्रती अर्घ्य देंगे। सोमवार को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रती पारण करेंगे। इसके साथ ही महापर्व संपन्न हो जाएगा। नहाय-खाय के दिन शुक्रवार को बड़ी संख्या में व्रती गंगा घाटों पर गेहूं धोने व सुखाने जाएंगे। कई व्रती घरों में गेहूं धोने के लिए घाट से गंगाजल ले जाएंगे।

गली-मोहल्लों की सड़कों की सफाई व रोशन करने का काम तेज हो गया है। छठ गीतों से माहौल भक्तिमय बना हुआ है। गुरुवार को कद्दू की कीमत 50से70 रुपये के बीच रही। पिछले साल कीमत सौ रुपये तक पहुंच गयी थी