हेल्थ सेक्टर की मांग है कि इस बजट में हेल्थकेयर को और मजबूती प्रदान करने के लिए कदम उठाए जाएं।

मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का ये अंतरिम बजट है. कहा जा रहा है कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट को 1 फरवरी को पेश करेंगी. इसी साल के मध्य तक लोकसभा चुनाव होने वाले हैं. इसकी वजह से लोगों को वित्त मंत्री से काफी उम्मीद है. कहा जा रहा है कि सरकार कुछ बड़े ऐलान कर सकती है. वहीं वित्त मंत्री टैक्स में किसी तरह का छुट का ऐलान कर सकती हैं. वहीं उद्योग जगत को भी वित्त मंत्री से काफी उम्मीदें हैं. जानतें हैं उनकी क्या मांगे हैं।

हेल्थ सेक्टर

हेल्थ सेक्टर की मांग है कि इस बजट में हेल्थकेयर को और मजबूती प्रदान करने के लिए कदम उठाए जाएं. देशभर में क्रिटिकल सर्विस को बूस्ट करने का काम किया जाए. इसके अलावा इसका बजट बढ़ाया जाए जिससे डेवलपमेंट के और काम हो सके. इतना ही नहीं आम लोगों तक हेल्थ सिस्टम पहुंचे इस दिशा में काम करने के लिए कोई नई स्कीम चलाई जाएं या पुराने स्कीम और मजबूत किया जाए. स्किल्ड वर्क फोर्स तैयार हो इसके लिए ट्रेनिंग और रिसर्च काम किया जाए. हेल्थ से संबंधित सेवाओं और मशीनों पर टैक्स कम किया जाए जिससे लोगों को इसका फायदा हो सके।

इसके अलावा दवाओं के लिए जरूरी एक्टिव फार्मास्युटिकल यानी एपीआई पर जीएसटी कम किया जाए. इसके साथ अधिक से अधिक दवाओं का उत्पादन हो सके इसलिए घरेलू दवा उद्योग को बढ़ावा दिया जाए. इससे देश की एक बड़ी आबादी को सस्ती और अच्छी दवाईयां मिलेगी. इसके साथ ही ये मेक इन इंडिया कार्यक्रम को बढ़ावा देगा।

इलेक्ट्रिक और होम अप्लायंसेज सेक्टर

इलेक्ट्रिक और होम अप्लाइंस सेक्टर वाले भी चाहते हैं कि एमएसएमई वाले छोटे व्यवसायी को टैक्स में राहत का ऐलान किया जाए. इसके अलावा पीएआई स्कीम चलाई जाए जिससे नए लोग भी सामने आए. क्योंकि कंपनियों को सबसे ज्यादा बोझ कैपिटल इनवेस्टमेंट का बोझ होता है जिसे कम किया जा सके. इसके अलावा टैक्स को और सरल किया जाए जिससे अधिक से अधिक स्टार्टअप इसका फायदा ले सकें. वहीं इनके उत्पादन के प्रोत्साहन के लिए जरूरी कदम उठाएं जाएं. एयर कंडीशन, रेफ्रिजरेटर, एलईडी लाइट, जिन पर 28 प्रतिशत का टैक्स लगा हुआ है उसे कम कर 18 प्रतिशत के दायरे में लाया जाए. इससे देश में रोजगार को बढ़ावा मिलेगा और आर्थिक विकास भी हो पाएगा. इससे मेक इन इंडिया को बढ़ावा मिलेगा।

ईवी मार्केट की उम्मीदें

आनेवाला समय ईवी का होगा. इस पर सरकार द्वारा कई कदम उठाए जा रहे हैं. लेकिन ईवी सेक्टर चाहता है कि सरकार इसके उपकरणों पर लगने वाले जीसटी को कम किया जाए. जो 28 प्रतिशत टैक्स के दायरे में है उन्हें 18 फीसदी के दायरे में लाया जाए. इससे इलेक्टिव वाहनों को बढ़ावा मिलेगा इसके साथ ही लोगों को किफायदी गाड़ियां मिलेंगी।