सृजन घोटाला : 13 डीएम, 6 डीडीसी, 38 अफसर और 19 नाजिरों से होगी पूछताछ

सृजन महिला विकास सहयोग समिति की स्थापना से लेकर अब तक भागलपुर के अफसर व नाजिरों की कुंडली खंगाली जा रही है। आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने जिला प्रशासन से तत्काल दस वर्षों का रिकार्ड मांगा है। 13 डीएम, छह उपविकास आयुक्त, 38 अफसर और 19 नाजिर जांच के घेरे में हैं। इन सबसे ईओयू की टीम पूछताछ करेगी। उसने सभी जिलाधिकारी से लेकर संबंधित विभागों के पदाधिकारियों व नाजिरों के विस्तृत जानकारी मांगी है। सृजन की स्थापना से लेकर अब तक भागलपुर में रहे जिलाधिकारी के नाम और मोबाइल नंबर भी मांगे गए हैं।
टीके घोष से आदेश तितरमारे तक का तैयार हो रहा डिटेल
तत्कालीन डीएम टीके घोष से लेकर वर्तमान डीएम आदेश तितरमारे का डिटेल तैयार किया जा रहा है। नजारत, भू-अर्जन, कल्याण, डूडा, डीआरडीए और जिला परिषद के अधिकारी न नाजिरों की भी सूची तैयार की जा रही है। सृजन की स्थापना से लेकर अब तक भागलपुर में 13 डीएम रहे हैं। ईओयू की टीम उन सबसे पूछताछ करेगी। आगे जब सीबीआई की टीम आएगी तो उसके लिए भी विस्तृत जानकारी को इकट्ठा किया जा रहा है।
ईओयू की टीम ने नजारत के एक-एक कागज की जांच की 
बुधवार को भी ईओयू की टीम ने नजारत के एक-एक कागजात की जांच की। डीआरडीए में हुए 57 करोड़ के घोटाले से जुड़ी फाइलों को भी खंगाला। नजारत के कागजातों की जांच सप्ताहभर से चल रही है। बीते दस वर्षों में नजारत में नाजिरों पर टीम की पैनी नजर है। हेड नाजिर के रूप में जगदीश मोदी, वीरेंद्र साव व अमरनाथ भगत काम कर चुके हैं। अभी ओमकुमार श्रीवास्तव काम कर रहे हैं। बाकी नाजिरों में अमरेंद्र कुमार यादव, प्रभात कुमार मोदी, आफताब आलम शामिल हैं। दस साल में आठ एनडीसी रह चुके हैं। फिलहाल एनडीसी जितेंद्र प्रसाद साह हैं। इन सबसे पूछताछ की जा रही है।
वर्ष 2000 में जो थे डीडीसी, आएंगे जांच के दायरे में 
वर्ष 2000 में तत्कालीन डीडीसी ने भी जिले के सभी बीडीओ को पत्र लिख कर सरकारी राशि को सृजन में जमा कराने का आदेश दिया था। एसआईटी को उस डीडीसी का लिखा पत्र भी मिल गया है। हालांकि अभी नाम का खुलासा नहीं किया जा रहा है। 2002 में डीडीसी के इस पत्र को तत्कालीन डीएम ने संपुष्ट भी किया था।
घोटालेबाजों ने बच्चों की 115 करोड़ की छात्रवृत्ति भी गटक ली
कल्याण विभाग में छात्रवृत्ति की 115 करोड़ की राशि भी बैंक ऑफ बड़ौदा, विभाग के अफसर और सृजन के पदधारकों ने मिलकर गटक ली। इस राशि से मैट्रिक व प्री मैट्रिक के छात्रों को छात्रवृत्ति दी जानी थी। इसको लेकर तिलका मांझी थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। अभी एक खाते की जांच बाकी है, इसमें 150 करोड़ की राशि होने की बात कही जा रही है। पहले भी कल्याण विभाग के छह करोड़ रुपए बैंक ऑफ बड़ौदा के खाते से गायब होने की प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है। इसमें जिला कल्याण पदाधिकारी अरुण और नाजिर महेश मंडल पर गाज गिर चुकी है। नाजिर की मौत के बाद से वहां कोई कागजात उपलब्ध करानेवाला नहीं है। इस कारण से उस खाते की जांच में देरी हो रही है।
राजीव ने स्कूल के लिए पटना में खरीदी जमीन  
भागलपुर के तत्कालीन भू-अर्जन पदाधिकारी राजीव रंजन सिंह (वर्तमान जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, भागलपुर) ने पटना में स्कूल खोलने के लिए जमीन खरीदी है। एसआईटी की जांच में इस बात का खुलासा हुआ है। सिंह फरार हैं। जमीन की रजिस्ट्री इसी साल कराई गई है। सिंह ने डूंडा शाही कांप्लेक्स में एक दुकान की भी रजिस्ट्री कराई है। इस कांप्लेक्स में जेल गए जिला कल्याण पदाधिकारी अरुण कुमार और उनकी पत्नी के नाम से भी दो दुकानें हैं। सिंह पर अनुशासनिक कार्रवाई के लिए एसएसपी मनोज कुमार ने डीएम आदेश तितरमारे को पत्र लिखा है