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शिक्षा विभाग ने जारी किया नया टास्क,सरकारी विद्यालयों का निरीक्षण करेंगे जिलाधिकारी

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राज्य के सरकारी विद्यालयों का निरीक्षण प्रत्येक जिले के जिलाधिकारी करेंगे। साथ ही, प्रत्येक जिलाधिकारी हर सप्ताह जिले के अधिकारियों द्वारा किए जा रहे विद्यालयों के निरीक्षण संबंधी रिपोर्ट की समीक्षा भी करेंगे।

इस दौरान विद्यालयों में पायी जाने वाली कमियों पर जिलाधिकारी निर्णय लेंगे। जबकि राज्य स्तर पर की जाने वाली कार्रवाई के लिए भी जिलाधिकारी प्रस्ताव शिक्षा विभाग को देंगे। इस संबंध में बुधवार को शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. एस. सिद्धार्थ की ओर से सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किया।

विद्यालयों के निरीक्षण में लगे हैं आठ हजार अधिकारी-कर्मचारी

अपर मुख्य सचिव डॉ.एस. सिद्धार्थ के निर्देश पर सभी 38 जिलों में तैनात आठ हजार अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा सरकारी विद्यालयों में निरीक्षण कराया जा रहा है। इसके साथ ही राज्य मुख्यालय के अधिकारियों द्वारा भी निर्धारित जिलों के विद्यालयों में निरीक्षण किया जा रहा है।

हर अधिकारी सप्ताह में कम से कम तीन दिन विद्यालयों के निरीक्षण कार्य में लगे हैं। जिन आठ हजार अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा विद्यालयों के निरीक्षण किया जा रहा है, उन्हें हर जिले के उप विकास आयुक्त द्वारा तीन माह के लिए 10 से 15 विद्यालय निरीक्षण हेतु दिए गए हैं।

निरीक्षण रिपोर्ट को विभाग के ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है। राज्य मुख्यालय के स्तर पर की जाने वाली समीक्षा में जो दोषी पाए जा रहे हैं उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जा रही है। आगे भी दोषियों पर कार्रवाई होगी।

मुख्यालय के अधिकारियों के निरीक्षण रिपोर्ट से जिलों के अधिकारियों से प्राप्त रिपोर्ट का मिलान कराया जा रहा है। इसमें भिन्नता पाये जाने पर उन अफसरों पर भी कार्रवाई की जा रही है।

शैक्षणिक आधारभूत संरचना का निरीक्षण भी अनिवार्य

अपर मुख्य सचिव डॉ. एस.सिद्धार्थ ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि निरीक्षण के दौरान विद्यालयों में उपलब्ध आधारभूत संरचना पर खास ध्यान दें। जहां कमियां पायी जाए वहां समाधान भी किया जाना चाहिए। निरीक्षण में कक्षाओं में शिक्षण सामग्री पर भी ध्यान फोकस करें।

 

इसमें चौक-डस्टर, उपस्कर, शौचालय, पेयजल और वर्गकक्ष की उपलब्धता के साथ प्रयोगशाला, आइसीटी लैब, चहारदीवारी, बिजली व्यवस्था खास तौर पर शामिल है। खेल का मैदान, खेल की सामग्री, इंटरनेट की उपयोगिता एवं सौंदर्यीकरण पर भी ध्यान दिया जाए।

यह भी देखा जा रहा है कि बच्चों के पास स्कूल ड्रेस और किताबें हैं या नहीं? बच्चों को गृहकार्य दिए जा रहे हैं या नहीं। बच्चों का साप्ताहिक, मासिक, त्रैमासिक, छमाही एवं वार्षिक मूल्यांकन हो रहा है या नहीं, यह भी देखा जाए। कक्षावार नामांकन और वास्तविक उपस्थिति भी देखें।

मिड डे मील में बच्चों को अंडे और फल दिए जा रहे हैं या नहीं ? भोजन में मेनू का पालन हो रहा है या नहीं? प्रधानाध्यापक एवं शिक्षकों का पदस्थापन एवं उनकी उपस्थिति के साथ इसकी निगरानी हो रही है कि घंटीवार-विषयवार पढ़ाई हो रही है या नहीं? इस पर भी फोकस किया जाना चाहिए।


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Kumar Aditya

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