देश से लेकर विदेश तक बढ़ी भागलपुर के पापड़ की मांग, दो साल में 30 प्रतिशत बढ़ा कारोबार

सस्ता और खस्ता होने की वजह से भागलपुरी पापड़ की डिमांड काफी बढ़ गयी है। पूर्वोत्तर राज्यों के अलावा नेपाल, भूटान व बंग्लादेश के लोग यहां के पापड़ को काफी पसंद करते हैं। इस कारण भागलपुर का पापड़ उद्योग लगातार बढ़ता जा रहा है। कारोबारियों के अनुसार पिछले दो सालों में कारोबार 30 प्रतिशत बढ़ गया है। नाथनगर, कबीरपुर, शाहजंगी, इशाकचक, मारूफचक, बल्टी कारखाना के समीप बड़े पैमाने पर पापड़ तैयार होता है।

बाल्टी कारखाना स्थित एक पापड़ के होलसेलर ओमप्रकाश गुप्ता ने बताया कि भागलपुर का पापड़ खस्ता होता है। इसके साथ दाम भी बाजार की कीमत से आधा है। इस कारण दूसरे देशों के साथ देश के कई राज्यों में इसकी डिमांड काफी है, लोकल पापड़ 75 से 80 रुपये किलो आसानी से मिल जाता है। यहां के पापड़ नेपाल, भूटान, बंग्लादेश, असम, मणिपुर, सिलीगुड़ी, बंगाल आदि जगहों पर बड़े पैमाने पर भेजे जाते हैं। इस उद्योग से कम-से-कम 15 हजार लोगों को रोजगार मिल रहा है।

महिलाएं घर पर बेलती हैं पापड़
ओमप्रकाश गुप्ता ने बताया कि पापड़ उद्योग से कई महिलाएं जुड़ी हैं। जो पापड़ को बेलती और सूखाती हैं। इसमें उन्हें कहीं जाने की जरूरत नहीं होती है। घर पर रहकर पापड़ बेलकर और सूखाकर वापस कारोबारी के पास पहुंचा देती हैं। इससे उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो रही है।

50 करोड़ का होता है सालाना कारोबार

आर्थिक मामलों के जानकार सीए प्रदीप कुमार झुनझुनवाला के अनुसार भागलपुर में पापड़ का सालाना कारोबार 50 करोड़ रुपये का है। यह कारोबार लगातार बढ़ रहा है। पूर्वोत्तर राज्य के लोग इसके खरीदार ज्यादा हैं। भागलपुर में कई युवा इस व्यापार से जुड़कर अच्छी आमदनी कर रहे हैं।

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