इन दोनों नाराज नेताओं को पार्टी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी है. एक ही जाति से आने वाले दो विधायकों को राज्य मंत्री का दर्जा दिया गया है.
नेताओं की नाराजगी कम करने की कोशिश: मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान पार्टी के कुछ नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह मिलने की उम्मीद थी. बिहपुर विधायक इंजीनियर शैलेंद्र जहां अगड़ी जाति से आते हैं, वहीं खजौली विधायक अरुण शंकर प्रसाद वैश्य समाज से आते हैं. मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान दोनों नेताओं को कैबिनेट में शामिल किए जाने की उम्मीद थी लेकिन उनको मौका नहीं मिला. भागलपुर क्षेत्र से नीतीश कैबिनेट में एक भी मंत्री नहीं थे, इस वजह से इंजीनियर शैलेंद्र का दावा बनता था. अब पार्टी ने उनकी नाराजगी को कम करने की कोशिश की है.
विधायकों को राज्य मंत्री का दर्जा होगा प्राप्त: भारतीय जनता पार्टी ने दोनों विधायकों को सचेतक बनाने का फैसला लिया है. इस बाबत विधान सभा की ओर से पत्र जारी कर दिया गया है. इंजीनियर शैलेंद्र और अरुण शंकर बिहार विधानसभा में पार्टी के सचेतक होंगे, इन्हें राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त होगा.
नाराज चल रहे थे दोनों विधायक: मंत्रिमंडल विस्तार के बाद विधायक इंजीनियर शैलेंद्र और विधायक अरुण शंकर नाराज हो गए थे. लंबे समय से प्रतिनिधित्व करने के आधार पर इनका दावा मजबूत बनता था और क्षेत्र में साफ सुथरी छवि की बदौलत यह मंत्रिमंडल में जगह चाहते थे. क्षेत्र की उपेक्षा को लेकर दोनों नेताओं ने पार्टी फोरम पर आवाज उठाई थी.
क्या बोले इंजीनियर शैलेंद्र?: वहीं, ईटीवी भारत से बातचीत के दौरान इंजीनियर शैलेंद्र ने कहा कि पार्टी जो भी जिम्मेदारी देती है, उसे हम लोग निभाने की कोशिश करते हैं. हमारे अंदर कोई नाराजगी नहीं थी. पार्टी में हमें सचेतक बनाया है और जो जिम्मेदारी हमें दी गई है, उसे जिम्मेदारी को मैं ईमानदारी पूर्वक निभाने का काम करूंगा.