लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर देश का सियासी पारा इस समय सातवें आसमान पर है…पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक चुनावी रैली में CAA को लेकर बड़ा बयान दिया है।

लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर देश का सियासी पारा इस समय सातवें आसमान पर है…पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक चुनावी रैली में CAA को लेकर बड़ा बयान दिया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि केंद्र सरकार ने 11 मार्च को नागरिकता संशोधन अधिनियम ( CAA ) लागू किया, जबकि संसद से यह कानून चार से पहले ही पास हो चुका था. सीएए में तीन देशों (पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान) से आए गैर-मुस्लिम शरणार्थियों (हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध और पारसी) को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान है. ममता बनर्जी ने कहा कि सीएए विदेशियों को भारत की नागरिका देने का एक ट्रैप है. देश में सीएए को एनआरसी लागू करने के लिए लाया गया है. टीएमसी चीफ ममता बनर्जी ने कहा कि हम पश्चिम बंगाल में न तो सीएए लागू होने देंगे और न एनआरसी।

बीजेपी को दी चुनौती

ममता बनर्जी ने कहा कि 2021 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में उन्होंने (बीजेपी)ने 200 से ज्यादा सीटें जीतने का लक्ष्य रखा था, लेकिन वो 77 पर ही सिमट गए. 77 में से भी कई विधायक हमारी पार्टी में शामिल हो चुके हैं. आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल में लोकसभा सीट की 42 सीटें हैं. ममता बनर्जी ने सभी सीटों पर अपनी पार्टी के उम्मीदवार उतारें हैं. हालांकि शुरुआत में माना जा रहा था कि ममता बनर्जी विपक्षी दलों के गठबंधन इंडिया का हिस्सा होने के नाते कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी. लेकिन टीएमसी यहां कांग्रेस के चार सीटों से ज्यादा देने को तैयार नहीं थी और इस तरह से दोनों पार्टियों के बीच सीट शेयरिंग पर बात बिगड़ गई।

बीजेपी को दी चुनौती

ममता बनर्जी ने कहा कि 2021 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में उन्होंने (बीजेपी)ने 200 से ज्यादा सीटें जीतने का लक्ष्य रखा था, लेकिन वो 77 पर ही सिमट गए. 77 में से भी कई विधायक हमारी पार्टी में शामिल हो चुके हैं. आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल में लोकसभा सीट की 42 सीटें हैं. ममता बनर्जी ने सभी सीटों पर अपनी पार्टी के उम्मीदवार उतारें हैं. हालांकि शुरुआत में माना जा रहा था कि ममता बनर्जी विपक्षी दलों के गठबंधन इंडिया का हिस्सा होने के नाते कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी. लेकिन टीएमसी यहां कांग्रेस के चार सीटों से ज्यादा देने को तैयार नहीं थी और इस तरह से दोनों पार्टियों के बीच सीट शेयरिंग पर बात बिगड़ गई।