बिहार की पटना हाईकोर्ट ने नये सरकार के विश्वासमत के दौरान उपस्थित रहने के लिए एमएलसी राधाचरण सेठ को फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है. कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार को चार सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दायर करने का आदेश दिया है. साथ ही मामले पर अगली सुनवाई की तारीख 18 मार्च, 2024 को तय किया है. जस्टिस सत्यव्रत वर्मा ने विधान पार्षद राधाचरण साह की ओर से दायर रिट याचिका पर सुनवाई की।

राधाचरण सेठ को हाईकोर्ट से राहत नहीं : उनके वकील ने कोर्ट को बताया कि विश्वासमत के पूर्व दोनों सदनों के संयुक्त बैठक में भाग लेने के लिए अनुमति देने की मांग कोर्ट से मांग की गई. वहीं, याचिका का विरोध करते हुए केंद्र सरकार के वकील एडिशनल सॉलिसिटर जनरल डॉ केएन सिंह ने कोर्ट को बताया कि विश्वासमत में विधानसभा के विधायक पक्ष व विपक्ष में वोट करते हैं,आवेदक विधान परिषद के सदस्य हैं. इन्हें विश्वासमत में मत देने का अधिकार नहीं है. उनका कहना था कि 12 फरवरी 2024 को विश्वासमत के दौरान उपस्थित रहने के लिए कोई जरूरत नहीं है।

गलत जानकारी देने पर कोर्ट ने लगाई फटकार : उन्होंने उपस्थित रहने के लिए अनुमति देने का कड़ा विरोध किया. वहीं, राज्य सरकार की ओर से सरकारी वकील अजय कोर्ट में उपस्थित रहे. कोर्ट ने इस केस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि गलत जानकारी देने के बजाये सही जानकारी देने की बात कही।

18 मार्च को अगली सुनवाई : कोर्ट के कहा कि ”जब विधान परिषद के सदस्य को विश्वसमत कार्रवाई में भाग नहीं लेना है तो फिर क्यों इसे अतिआवश्यक बता कर सुनवाई के लिए अनुरोध किया गया?” कोर्ट ने केंद्र सरकार को चार सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दायर करने का आदेश दिया. साथ ही मामले पर अगली सुनवाई की तारीख 18 मार्च 2024 निर्धारित की है. बता दें कि ईडी ने कार्रवाई कर राधाचरण साह को गिरफ्तार किया था. जेडीयू एमएलसी बालू में टैक्स चोरी के मामले में बंद हैं. ईडी ने उनकी 26 करोड़ की संपत्ति भी हाल ही में अटैच की है।